फोटो: पीएचसी में बने वाटर टैंक का खुला मुंह व आसपास उगी घास।
फोटो: पीएचसी में बने वाटर टैंक में भरा गंदा पानी, जिसे पीते है मरीज व तीमारदार।
संवाद न्यूज एजेंसी
नगीना। प्रदेश सरकार और प्रशासन भले ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के बड़े-बड़े दावे करे, लेकिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) नगीना की धरातली हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। यहां इलाज कराने आ रहे मरीजों और उनके परिजनों को पीने का स्वच्छ पानी तक नसीब नहीं हो रहा है। मजबूरी में लोग दूषित पानी पीने या बाजार से बोतल खरीदकर दवा लेने को विवश हैं।
सर्व जातीय सेवा समिति के उपाध्यक्ष रजत जैन ने बताया कि इस केंद्र के तहत करीब 44 गांवों की आबादी निर्भर है। इसके बावजूद अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं का अकाल है। परिसर में स्थित वाटर टैंक (कुंडा) का ढक्कन लंबे समय से टूटा हुआ है। ढक्कन न होने से धूल-मिट्टी, कचरा और कीट-पतंगे पानी में गिरकर उसे जहरीला और संक्रमित बना रहे हैं। बारिश के मौसम में इससे जलजनित बीमारियों और संक्रमण फैलने का खतरा कई गुना बढ़ गया है। जिस अस्पताल में लोग ठीक होने आते हैं, वहां दूषित पानी मिलना प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा सबूत है।
आरओ और वाटर कूलर भी पड़े हैं ठप
अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए जैन व गोविंद दूबे ने स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन से तत्काल स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था करने और खराब उपकरणों को ठीक कराने की मांग की है।
अधिकारी का पक्ष
हाल ही में किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा वाटर टैंक का ढक्कन तोड़ा गया है। मामला संज्ञान में आते ही इसे तुरंत प्रभाव से बदलवाने और नया ढक्कन लगवाने के निर्देश दे दिए गए हैं।
— डॉ. कृष्ण कुमार, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी
पीएचसी में बने वाटर टैंक में भरा गंदा पानी, जिसे पीते है मरीज व तीमारदार