- खेल नर्सरियों से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बना रहे पहचान
- प्रशिक्षक बोले- खेल नर्सरियों पर और ध्यान दे सरकार तो खिलाड़ी भी खूब निखरेंगे
स्वरांजलि
गुरुग्राम। जिले में चल रहीं खेल नर्सरियों में खूब पसीना बहाकर म्हारे खिलाड़ी न केवल जिला बल्कि राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खूब नाम कमाते हुए जिले व प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। इन खिलाड़ियों को खेल नर्सरियों में पूरे अनुशासन के साथ प्रशिक्षण दिया जा रहा है मगर खेल प्रशिक्षकों का कहना है कि सरकार यदि खेल नर्सरियों की ओर ज्यादा ध्यान दिया जाए तो यहां से निकलने वाले खिलाड़ी खूब नाम चमका सकते हैं। बस, वे कैसे निखरे, इस ओर खेल विभाग को ध्यान देना होगा।
जिले में कुल 36 नर्सरियां हैं, जिनमें 20 सरकारी और 16 निजी नर्सरियां शामिल हैं। यहां प्रशिक्षकों की निगरानी में खेल प्रतिभाओं को तराशा जा रहा है। प्रत्येक नर्सरी में खिलाड़ियों को आधुनिक प्रशिक्षण उपकरणों से अभ्यास कराया जा रहा है।
इसके अलावा खिलाड़ियों को प्रत्येक माह डाइट के लिए राशि देने का भी प्रावधान है। खेल नर्सरी में तैयारी करने वाले 8 से 14 वर्ष की आयु के खिलाड़ियों को हर महीने 1500 रुपये और 15 से 19 वर्ष की आयु के खिलाड़ियों को दो हजार रुपये की राशि बतौर डाइट मनी दी जाती है।
कायकिंग कोच जयदीप ने बताया कि खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने के लिए संपूर्ण डाइट दी जानी चाहिए, ताकि खिलाड़ियों में खेलों के प्रति रुचि बढ़ सके। उन्होंने बताया कि कायकिंग के आठ खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके हैं। जिनमें संजना, मनीषा, नंदनी, आंचल, नेहा, विपिन, शिवानी व अनुप का नाम शामिल है।
हैंडबाल कोच गौरव ने बताया कि खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने के लिए रोजाना अभ्यास करना चाहिए। इसके लिए प्रशिक्षकों को भी पूरी गंभीरता बरतनी होगी। साथ ही अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीन खिलाड़ी खेल चुके हैं, जिनमें अंजलि चौहान, कोमल चौहान और जय का नाम शामिल है।
फुटबाल कोच राजकुमार के अनुसार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने के लिए खिलाड़ियों को समय-समय पर डाइट मनी दी जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि फुटबाल में फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभी तक कोई खिलाड़ी नहीं खेला है। पिछले साल कुनाल ने राष्ट्रीय स्तर पर खेला था।
एथलेटिक कोच सुनील बताते हैं कि खेल मैदानों व खेल उपकरणों की उचित व्यवस्था होनी चाहिए, तभी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ी नाम चमका सकते हैं। खिलाड़ियों को खेल नर्सरियों में पर्याप्त खेल उपकरण भी दिए जाने चाहिए।
एथलेटिक कोच सतेंद्र के मुताबिक प्रशिक्षकों को इस बात की ओर ज्यादा फोकस करना चाहिए कि खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाने के लिए कैसे निखारा जाए। इसके लिए विशेष प्रशिक्षक भी दिलाया जाना चाहिए। उनके अनुसार एथलेटिक के दो खिलाड़ी अभय और अनुराग राष्ट्रीय स्तर पर भाग ले चुके हैं।