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नूंह हिंसा : श्रमिकों ने किया पलायन...प्रभावित हुआ कारोबार

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सांप्रदायिक हिंसा के बाद बड़ी संख्या में श्रमिक दूसरे शहरों में गए, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल और मेवात सभी जगह एक जैसे हालात
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अमर उजाला ब्यूरो

गुरुग्राम/फरीदाबाद/नूंह/पलवल। नूंह में 31 जुलाई को हुई हिंसा के बाद गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह और पलवल से बड़ी संख्या में एक समुदाय के लोग पलायन कर गए हैं। इनमें ज्यादातर दिहाड़ी मजदूर, फैक्ट्री श्रमिक, फल सब्जी विक्रेता और मोटर मैकेनिक शामिल हैं। दंगे के डर से जहां इन श्रमिकों का घर-बार छूट गया है, वहीं इन जिलों में कारोबार भी प्रभावित हुआ है। एक अनुमान के मुताबिक अब तक करीब पांच हजार से ज्यादा लोग दूसरे शहरों में चले गए हैं। इसका असर अब दिखाई देना शुरू हो गया है।
आईएमडी इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के महासचिव मनोज त्यागी कहते हैं कि उनके यहां पर रेडीमेड गारमेंट का बहुत बड़ा काम है। इसमें 70 फीसदी से ज्यादा कारीगर एक समुदाय से हैं। निर्यात तक प्रभावित हुआ है। समय पर ऑर्डर पूरा होने में समस्या आई है। इसके अलावा यहां पर ऑटोमोबाइल्स, वेल्डिंग, इंजीनियरिंग वर्क्स, प्लास्टिक, पेंट आदि की बड़ी इकाइयां हैं। इनमें हजारों की संख्या में कारीगर हैं। एक औद्योगिक यूनिट का काम दूसरी यूनिट से जुड़ा है। मौजूदा हालात में सब कुछ प्रभावित हुआ है। शहर में किराए पर रहने वालों ने मकान खाली किए हैं। लोगों ने अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए हैं। इससे जिन स्थानीय लोगों को किराए के रूप में पैसा मिल रहा था, वह भी प्रभावित हुए हैं।
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फरीदाबाद में भी 500 से अधिक परिवारों ने दूसरे शहरों का रुख किया
नूंह हिंसा के बाद बने हालात के चलते फरीदाबाद से भी लोगों ने पलायन करना शुरू कर दिया है। शहर में छोटे-बड़े कारोबार से जुड़े 500 से अधिक परिवार यहां से दूसरे स्थानों पर चले गए हैं। औद्योगिक नगरी में विशेष समुदाय से जुड़े लाखों लोग रहते हैं। पिछले दिनों नूंह में हुए दंगों के बाद समुदाय से जुड़े लोगों के खिलाफ घटनाएं बढ़ गई हैं। ऐसे में लोगों में डर का माहौल बना हुआ है जिससे वह दूसरे शहरों में जा रहे हैं। काम धंधा चौपट होने के कारण अनेक लोग चले भी गए हैं। एनआईटी 5 सहित अन्य स्थानों पर चाय के स्टाॅल और रेहड़ी आदि लगाने वाले अब दिखाई नहीं देते हैं। पुलिस की तरफ से भी उन्हें कुछ दिन काम बंद रखने की बात कही जा रही है। सेक्टर-23 निवासी रियासत अली ने कहा कि वर्कशॉप बंद होने से काफी परेशानी हो रही है। प्रशासन को इस तरह के लोगों को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए जिससे समाज में सुख शांति का माहौल बना रहे।







पलवल में फल, सब्जी, चूड़ी व्यापार के साथ निर्माण कार्य प्रभावित

नूंह हिंसा के बाद जिले में रह रहे दूसरे राज्यों के हजारों की संख्या में मुस्लिम समाज के लोग पलायन कर गए हैं। माना जा रहा है कि पलवल से करीब दो हजार लोग पलायन कर चुके हैं। अभी मुस्लिम समाज के लोगों का पलायन करने का सिलसिला बना हुआ है। सब्जी व फल मंडियों में पपीता व नारियल का काम करने वाले मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग बृहस्पतिवार को भी अपने काम धंधे को बंद कर वापिस चले गए। अब ये लोग कब तक लौटेंगे, इसका किसी को नहीं पता। चूड़ी व्यापार के साथ निर्माण कार्य भी प्रभावित हुआ है। इन लोगों के लगातार पलायन करने से जिले में व्यापारियों के धंधे पर काफी असर पड़ रहा है।


ट्रक कम चलने से सामान नहीं जा पा रहा आगे


ज्यादातर ट्रकों पर मेवात के मुस्लिम समाज के लोग चालक व परिचालक हैं। ऐसे में हिंंसा बढ़ते देख मेवात के उन चालकों ने ट्रकों पर फिलहाल जाना बंद कर रखा है। इस कारण से ट्रक कम चलने से व्यापारियों तथा कंपनियों का सामान जहां है, वहीं रुका हुआ है। साथ ही काफी माल ऐसा है, जो ट्रकों के माध्यम से भरकर नहीं ले जाया रहा है। इससे भी काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
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रोजका वेव पर भी दिख रहा असर
नूंह में हुई हिंसा का प्रभाव यहां औद्योगिक क्षेत्र रोजका मेव पर भी दिखा है। हिंसा की खबर से यहां कई प्लांट से लेबर गई है। इसके कारण यूनिटों को दिक्कत हो रही है। इस संदर्भ में यहां के मेवात चेंबर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारी उपायुक्त से मिले हैं। कहा कि औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा के साथ-साथ यहां ऐसे प्रबंध किए जाएं जिससे श्रमिकों में असुरक्षा की भावना पैदा न हो क्योंकि यहां काफी श्रमिक बाहर के जिलों के हैं जोकि कामकाज की तलाश में यहां रहने लगे थे। इनमें से कुछ श्रमिक पलायन कर चुके हैं।
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