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अब नहीं भटकेंगी उत्पीड़न की शिकार महिलाएं

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गुरुग्राम (कुमार प्रवीण)। उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को अब अपनी समस्या के लिए इधर-उधर नहीं भटकना होगा। प्रशासन की ओर से चलने वाला वन स्टॉप-सखी सेंटर जल्द ही हाईटेक भवन में नजर आएगा। इसके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग को नया भवन बनाने की मंजूरी दे दी है। प्रस्ताव आदि की तकनीकी प्रक्रिया के बाद भवन निर्माण का कार्य आरंभ कर लिया जाएगा। ये भवन सभी सुविधाओं से लैस होगा।
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हाईटेक हो चुके गुरुग्राम जैसे शहर में महिला एवं बाल विकास विभाग का वन स्टॉप-सखी सेंटर आज भी दशकों पुुराने भवन में चल रहा है। महज दो कमरों के जर्जर भवन में चलाए जा रहे इस सेंटर में शिकायत लेकर आने वाली महिलाओं से लेकर यहां तैनात स्टाफ को अक्सर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। फिलहाल यह सेंटर बाल उद्यान स्थित सरस्वती कुंज के दो कमरों से संचालित किया जा रहा है। मिलेनियम सिटी गुरुग्राम में विदेशी भी बड़ी संख्या में रहते हैं। अक्सर विदेशी महिलाएं भी सेंटर में शिकायतें लेकर आती हैं। पुराने ढर्रे पर व्यवस्थाएं होने के कारण कई बार विभाग को शर्मसार होना पड़ता है। इसके अलावा दो कमरे होने के कारण भी विभागीय अधिकारियों और विशेषज्ञों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी परेशानी को महिला एवं बाल संरक्षण अधिकारी सुनैना खत्री ने उपायुक्त डॉ. यश गर्ग के सामने रखा तो उपायुक्त सेंटर के लिए नया भवन उपलब्ध कराने को हरी झंडी दे दी।
दो कमरों में होती है परेशानी
सेंटर के लिए फिलहाल दो ही कमरे हैं। इन दो कमरों में ही सेंटर प्रभारी का ऑफिस बना है, शिकायतें भी यहीं सुनी जाती हैं। काउंसिंग के लिए कोई अलग से व्यवस्था नहीं है। ऊपर से उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को कई बार शेल्टर भी मुहैया कराना पड़ता है। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि विभाग को कितनी परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है।
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ये है नियम
नियम के मुताबिक सेंटर के लिए कुल क्षेत्र 300 वर्ग मीटर होना चाहिए, जिसमें 102 वर्ग मीटर का खुला मैदान भी जरूरी है। कारपेट एरिया 132 वर्ग मीटर होना चाहिए। इतने स्थान में भूतल पर ऑफिस कम विडियो कांफ्रेंसिंग रूम, एक कमरा एडमिनिस्ट्रेटर के लिए, मेडिकल कंस्लटेंट या काउंसलिंग के लिए एक कमरा, दो टॉयलेट, पांच बेड का एक छोटा शेल्टर, एक रसोई होनी जरूरी है। प्रथम तल एडमिनिस्ट्रेटर के निवास के लिए आरक्षित होता है। इसमें दो कमरे, एक रसोई और टॉयलेट के अलावा अन्य सुविधाओं का निर्माण जरूरी है।
जैसे-तैसे चला रहे काम
महिला एवं बाल संरक्षण अधिकारी सुनैना खत्री ने कहा कि फिलहाल जैसे-तैसे काम चला रहे हैं। यहां शिकायत लेकर आने का कोई समय निश्चित नहीं है। किसी भी समय कोई भी महिला शिकायत लेकर आ सकती है। कई बार पुलिस से पहले सखी सेंटर तक शिकायत पहुंचती है। ऐसे में दुर्गा शक्ति पुलिस की सहायता ली जाती है। चूंकि शिकायत के लिए कोई समय निर्धारित नहीं है, ऐसे में यहां एडमिनिस्ट्रेटर का निवास नहीं होने से बड़ी दिक्कत होती है। कई बार देर रात उन्हें अपने घर से सेंटर पहुंचना पड़ता है। यहां विदेशी महिलाएं भी अपनी शिकायतें लेकर आती हैं। इस लिहाज से शहर में आधुनिक सुविधाओं से लैस सखी सेंटर की बहुत जरूरत है। उपायुक्त महोदय ने प्रस्ताव बनाकर देने को कहा। हमने डीसी की मीटिंग में मुद्दा उठाया था, उन्होंने वर्किंग वुमेन हॉस्टल में बनाने की बात कही है।
नए सखी सेंटर के निर्माण के लिए प्रस्ताव बनाने को कहा गया है। वर्किंग वूमेन हॉस्टल में तीन सौ वर्ग मीटर जमीन है। महिलाओं से जुड़ा मसला होने के कारण इसे वहीं बनाने का प्लान है। जल्द ही तकनीकी प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है। निश्चित ही इससे विभाग के साथ यहां शिकायतें लेकर आने वाली महिलाओं को सहूलियत होगी।
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-डॉ. यश गर्ग, उपायुक्त
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