गुरुग्राम। कोरोना का प्रभाव कम होने के बाद एक बार फिर बढ़ने लगा है। बीते समय से रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए काढ़े का प्रयोग किया जा रहा है। हालांकि जहां कोरोना से बचाने में बड़ा मददगार रहा है वहीं इसकी अधिक मात्रा भी मरीजों को नुकसान कर सकती है। तापमान बढ़ने लगा है ऐसे में लोगों को काढ़े की मात्रा को कम करना होगा।
यह बात जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. मंजू बांगड़ ने कही। उन्होंने बताया कि काढ़े के प्रति लोग जागरूक है। भारी मात्रा में आयुर्वेद विभागों से काढ़ा खरीदा जा रहा है। लेकिन लोगों को इसकी सीमित मात्रा में ही प्रयोग करना चाहिए। अधिक प्रयोग से पेट में जलन, सीने में जलन की समस्याएं भी सामने आ रही है।
उनके पास ऐसे भी मरीज पहुंच रहे हैं जिन्हें काढ़े के अधिक प्रयोग से नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि दिन में एक लौंग और एक काली मिर्च का सेवन करना जरूरी है। कोरोना से स्वस्थ हो चुके मरीजों को भी एक समय काढ़े का प्रयोग करते रहना चाहिए।
आंवले की मात्रा बढ़ानी होगी
डॉ मंजू ने बताया कि महिलाओं द्वारा लौंग, काली मिर्च, गिलोय आदि के मिश्रण से काढ़ा बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि महिलाओं को इसमें अब आंवले की मात्रा को बढ़ा देना चाहिए। रोग प्रतिरोधक क्षमता के साथ इससे त्वचा, चेहरे व बालों को भी फायदा पहुंचता है। अधिकतर डिस्पेंसरी, पंसारी की दुकानों से काढ़ा खरीदा जा सकता है। इन दिनों महिलाएं भी घर पर खुद ही काढ़ा बना रही हैं।
स्वागत पर चाय नहीं सर्व हो रहा काढ़ा
इन दिनों किसी भी कार्यक्रम, रेस्तरां या पार्टी आदि में चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक की जगह काढ़े ने ली है। लोगों के स्वागत पर उन्हें सबसे पहले काढ़ा ही सर्व किया जा रहा है। जिसकी वजह से दिन भर में लोग एक या दो की जगह कई बार काढ़ा पी रहे हैं। इससे शरीर में काढ़े की मात्रा अधिक हो जाती है। यह शरीर को नुकसान पहुंचाने लगता है।