इस कारण हुआ शिक्षा का बंटाधार
जिले के सभी प्राइवेट स्कूलों का हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड में पास 33 प्रतिशत रहा, वहीं सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत 67 रहा है। अभिभावकों का कहना है कि जिले में शिक्षकों के आधे से ज्यादा पद रिक्त हैं। जिस कारण स्कूलों में ठीक ढंग से पढ़ाई नहीं हो पाई। इसी कारण शिक्षा को बंटाधार हुआ है।
प्रदेश में सबसे पीछे रहा नूंह
इस बार नूंह में 12वीं की परीक्षा में प्राइवेट व सरकारी स्कूलों के 7,588 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी थी। जिनमें 3,472 परीक्षार्थी उर्तीण हुए। 1,758 परीक्षार्थियों की कंपार्टमेंट आई थी। जबकि 2,358 परीक्षार्थी फेल हुए थे। जिले का परीक्षा परिणाम 45.79 प्रतिशत ही था। जो प्रदेश में सबसे कम था। नूंह जिला प्रदेश में 22 वें स्थान पर था। जिले में कई स्कूलों का परीक्षा परिणाम बेहद ही खराब रहा। तीन सरकारी स्कूल तो ऐसे थे, जिनमें एक भी परीक्षार्थी पास नहीं हुए।
सरकारी ही नहीं प्राइवेट स्कूल का हाल भी रहा बदतर
जानकारी के अनुसार ओथा गांव के सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आठ छात्रा व पांच छात्रों ने परीक्षा दी थी, जिनमें से सभी परीक्षार्थी फेल हो गए। इस तरह मूलधान के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में एक छात्रा थी, वह भी पास नहीं हो पाई। जिले के जाडोली स्कूल में चार छात्राओं ने परीक्षा दी थी। जिनमें चारों छात्राएं असफल रहीं। सरकारी स्कूल ही नहीं जिले के प्राइवेट स्कूलों की हालत भी बदतर रही है। फिरोजपुर झिरका के सरस्वती विद्यामंदिर, अंसार पब्लिक स्कूल साकरस, एपीएस पब्लिक स्कूल सिंगलहेडी स्कूल का परीक्षा परिणाम भी शून्य रहा है।
निजी से बेहतर रही सरकारी स्कूलों की स्थिति
विभाग के अधिकारियों के माने तो जिले में फिर भी सरकारी स्कूलों की स्थिति निजी से बेहतर रही है। सरकारी स्कूलों का परीक्षा परिणाम ठीक रहा है। खैर जो भी हो इस बार परीक्षा परिणाम में शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। इस बारे में जिला शिक्षा अधिकारी अजीत सिंह का कहना है की परीक्षा परिणाम बहुत काम आया है। लेकिन हमारी कोशिश होगी इससे सबक लेकर आगे से बेहतर करें।