50 रुपये वाली थाली 70 में, कालाबाजारी के कारण श्रमिकों की बढ़ी परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
बादशाहपुर। महंगाई और गैस की किल्लत ने जिले के लोगों की दिनचर्या पूरी तरह चरमरा दी है। एक ओर गैस की किल्लत के कारण लोगों की थाली से राहत देने वाली रोटी गायब हो गई है तो वहीं दूसरी और महंगाई ने जायका ही बिगाड़ दिया है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, खाने-पीने की वस्तुओं के दाम में बढ़ोतरी हुई है। 50 वाली थाली 70 रुपये में मिल रही है।
शहर के कई इलाके जैसे पटौदी और सोहना के ग्रामीणों ने लिखित शिकायत देकर गुरुग्राम के डीसी को गैस की कालाबाजारी कर रही एजेंसियों के बारे में अवगत कराया था। इस कालाबाजारी के कारण आर्थिक रूप से कमजोर लोग बुरी तरह प्रभावित हैं। साथ ही जिनके पास आधिकारिक बुकिंग कॉपी नहीं है, उन्हें बाजार में एक सिलिंडर के लिए चार से पांच रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। सरकार के दावों के उल्ट, नियम अनुसार बुकिंग कराने के बावजूद लोगों को हफ्तों तक इंतजार करना पड़ रहा है।
ढाबा संचालकों ने बढ़ाए दाम
बेल पत्थर का जूस बेचकर गुजारा करते हैं और रोजाना ढाबों पर खाना खाते हैं। पिछले कुछ दिन में कई ढाबों ने खाने की थाली के दाम बढ़ा दिए हैं। अब पेट भरना भी महंगा साबित हो रहा है। जो थाली पहले 50 रुपये की आती थी अब उसी थाली के लिए 70 रुपये तक देने पड़ रहे हैं। -अरमान, जूस की रेहड़ी लगाने वाला
गांव झाड़सा के किराये के कमरों में रहने वाले कई मजदूर यहां से कमरा खाली कर गांव लौट गए हैं। न यहां सस्ता राशन मिल रहा है और न ही खाना बनाने के लिए किफायती गैस मिल पा रही है। -सतीश, रिक्शा चालक
5 किलोग्राम वाला सिलिंडर तो जैसे बाजार तक पहुंचे ही नहीं हैं। बहुत मुश्किल से काम चल रहा है। मजदूरी का बड़ा हिस्सा अब सिर्फ गैस और खाने पर ही खर्च हो जा रहा है। - राज कुमार, मिस्त्री
गैस सिलिंडर मिल पाना किसी जंग जीतने जैसा हो गया है। घंटों मशक्कत के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ता है। -मोहित, श्रमिक