कर्मचारी लंबे समय से स्थायीकरण की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे थे
नंबर गेम - 400 एनएचएम कर्मचारियों को मिली राहत
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मचारियों को राहत देने वाला फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि स्थायी प्रकृति का काम कराते हुए वर्षों तक ठेके पर नहीं रखा जा सकता है। इस निर्णय से जिले के करीब 400 एनएचएम कर्मचारी, जो विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्यरत हैं, को राहत मिली है। ये कर्मचारी लंबे समय से स्थायीकरण की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे थे और कई बार विरोध प्रदर्शन भी कर चुके हैं। लगभग 10 वर्षों से संविदा पर कार्यरत इन कर्मचारियों ने इसे पीड़ादायक अनुभव बताया। अदालत का यह फैसला उनके अधिकारों और सम्मान की दिशा में बताया गया है।
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2016 से चल रही थी लड़ाई
पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा के एनएचएम संविदा कर्मचारियों के पक्ष में टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार अस्थायी व्यवस्था का सहारा लेकर कर्मचारियों के संवैधानिक अधिकारों से इनकार नहीं कर सकती। अदालत ने स्पष्ट किया है कि वित्तीय बोझ या स्वीकृत पदों की कमी जैसे कारणों से लंबे समय से कार्यरत कर्मियों को अनिश्चित भविष्य में नहीं धकेला जा सकता। कर्मचारी संघ के अनुसार, 2016 से चल रही लड़ाई के बाद आया यह फैसला एनएचएम कर्मचारियों के भविष्य को स्थिरता देगा। गुरुग्राम सहित स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत स्टाफ में इस निर्णय से उम्मीद बढ़ी है।
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एनएचएम कर्मी 10-15 साल से सेवा में
याचिकाकर्ताओं ने बताया था कि वे एएनएम, स्टाफ नर्स, लैब तकनीशियन, स्वास्थ्य कार्यकर्ता और अन्य जरूरी पदों पर 10 से 15 वर्षों से लगातार सेवाएं दे रहे हैं। उनकी नियुक्ति विज्ञापन निकालकर, मेरिट सूची तैयार कर और चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद की गई थी।
कर्मचारी बोले-अब स्थायी होने की बढ़ी उम्मीद
10 वर्षों तक संविदा पर कार्य करना कर्मचारियों के लिए अत्यंत पीड़ादायक रहा। उच्च न्यायालय का यह निर्णय उनकी प्रतिष्ठा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। -
हरि राज, प्रदेश अध्यक्ष, एनएचएम कर्मचारी संघ, हरियाणा
मुझे नौकरी करते हुए दस वर्ष से अधिक हो गए हैं। कई बार उच्चाधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। हाईकोर्ट के इस फैसले से अब काफी राहत मिली है और स्थायीकरण की उम्मीद भी बढ़ गई है। -
सरिता, सीएचसी-घांघरोला
कोर्ट के फैसले से काफी खुशी हुई है। सभी काम करने के बावजूद हम अस्थायी थे। लंबी लड़ाई के बाद अब उम्मीद जगी है कि जल्द स्थायीकरण किया जाएगा। -
आलोक शर्मा, यूपीएचसी-सूरत नगर
नौकरी में काफी लंबा समय बीत गया है। स्थायी करने को लेकर 2016 से लड़ाई जारी थी। कोर्ट के फैसले के बाद हमें राहत मिली है और स्थायीकरण की उम्मीद जगी है। -
कमला देवी, यूपीएचसी-सूरत नगर