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Gurugram News: नूंह जिले के बूचड़खाने पर एनजीटी की निगाहें, कोर्ट में याचिका स्वीकार

Sat, 20 Sep 2025 11:16 PM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
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मेवात के प्रभावित लोगों ने फिर उठाई आवाज, मानकों का पालन न करने का आरोप
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संवाद न्यूज एजेंसी

फिरोजपुर झिरका। जिले के फिरोजपुर झिरका उपमंडल के घाटा-शमशाबाद सीमा क्षेत्र में संचालित यूनाइटेड फार्म प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड बूचड़खाना गंभीर आरोपों के चलते अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की निगरानी में आ गया है। इस बूचड़खाने की अनियमितताओं को उजागर करते हुए एनजीटी में याचिका दायर की गई है। अधिवक्ता सत्येम शेखर द्वारा दायर की गई इस याचिका को एनजीटी कोर्ट ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।

हैदर अली और स्थानीय प्रभावित लोगों का कहना है कि यूनाइटेड फार्म प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित यह बूचड़खाना पर्यावरण संरक्षण के लिए निर्धारित मानकों का पालन नहीं कर रहा है। न केवल ग्रीन बेल्ट के लिए निर्धारित भूमि की अनदेखी की गई है व संपूर्ण भूमि का भूमि रूपांतरण नहीं है बल्कि अपशिष्ट प्रबंधन, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और अन्य शर्तों की भी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उनका आरोप है कि बूचड़खाना पशुओं के खून और अन्य अपशिष्ट को घाटा शमशाबाद एवं अलीपुर तिगरा गांव की गैर मुमकिन पहाड़ की जमीन पर एवं पंचायत की जमीन पर अतिक्रमण कर गड्ढों में डाल रहा है, जिससे आसपास की कृषि भूमि और भूजल दोनों प्रभावित हो रहे हैं। भूजल के प्रदूषित होने से स्थानीय लोगों की सेहत पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। याचिका में यह भी कहा गया है कि हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) द्वारा जारी दस्तावेज और रिपोर्टें वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खातीं। हैदर अली ने इसके लिए सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत कई बार जानकारी मांगी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आंशिक जानकारी दी, लेकिन वह अधूरी और जमीनी सच्चाई से परे पाई गई। वहीं, हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण ने भूजल उपयोग से संबंधित जानकारी देने से इंकार कर दिया और इसे आरटीआई अधिनियम के तहत छूट प्राप्त बताया। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि बूचड़खाना पहाड़, पंचायत भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करके वहां अपशिष्ट डाल रहा है। इसके अलावा पशु क्रूरता अधिनियम के प्रावधानों का भी उल्लंघन किया जा रहा है। जानवरों को बूचड़खाने में रखने और उनके वध की प्रक्रिया में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा, जिससे पशुओं के साथ अमानवीय व्यवहार हो रहा है। हैदर अली ने एनजीटी से मांग की है कि एक स्वतंत्र समिति गठित कर बूचड़खानों का निरीक्षण कराया जाए, भूजल उपयोग के लिए दिए गए एनओसी की गहन जांच हो और ग्रीन बेल्ट नियमों के उल्लंघन एवं भूमि रूपांतरण सहित अन्य गंभीर खामियों पर भारी-भरकम पर्यावरणीय जुर्माना लगाया जाए। साथ ही, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य जिम्मेदार विभागों की लापरवाही की भी जवाबदेही तय की जाए।
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एनजीटी ने याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है और जल्द ही मामले पर विचार करेगा। इसकी आगामी सुनवाई नवंबर माह में है। इस पहल से उम्मीद जगी है कि नूंह जिले में संचालित बूचड़खानों की कार्यप्रणाली पर सख्ती से निगरानी की जाएगी और पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित होगा। साथ ही, स्थानीय लोगों को दूषित जल और प्रदूषित वातावरण से निजात मिलेगी।
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