साइबर सिटी में लोगों ने कहा-सिटी बस सेवा को बेहतर करने की जरूरत
कुल 36 रूट है पूरे शहर में, 24 रूटों पर ही चलती सिटी बस
मिलेनियम सिटी के रूप में दुनिया भर में पहचान बना चुके गुरुग्राम में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा को और बेहतर करने की जरूरत है। यहां मेट्रो स्टेशन तक पहुंचने या वहां से घर तक जाने के लोगों को मशक्कत करनी पड़ती है। ऑटो वाले मनमाना किराया वसूलते हैं। सिटी बस कब आएगी पता नहीं रहता है। आज से शुरू हो रही सीरीज में यह जानने की कोशिश होगी कि शहर में सार्वजनिक परिवहन की स्थिति क्या है और नए इलाकों में रह रहे लोगों की मांग क्या है।
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। साइबर सिटी में चलने वाली सिटी बस दैनिक यात्रियों की जरूरतों पर खरी नहीं उतर रही है। सिटी बस की सेवा अभी पुराने शहर में है। न्यू गुरुग्राम में कुछ ही जगह पर बस जाती है। लोग ई बाइक और टैक्सी से सफर करने को मजबूर हैं। लोगों की मांग है कि न्यू गुरुग्राम, पटौदी, सोहना और मानेसर के रूट पर भी सिटी बसें चलाई जाएं।
अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही सिटी बस सर्विस का बड़े पैमाने पर विस्तार किया जाएगा, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं दिख रहा है। वर्तमान में गुरुग्राम में कुल 36 रूट हैं, जिनमें से 24 रूटों पर बसें चल रही हैं। इन रूटों के माध्यम से शहर के पुराने और नए दोनों हिस्सों को जोड़ा गया है। वहीं, 12 रूट फरीदाबाद से जुड़े हुए हैं। रोजाना यात्रा करने वालों को निजी साधनों का इस्तेमाल कर अपने स्थानों पर पहुंचना पड़ता है। ऑटों, कैब, टैक्सी सार्वजनिक परिवहन से मंहगा पड़ता है। शहर की जनसंख्या अधिक होने से शहर में चल रही बसों की संख्या पर्याप्त नहीं हैं। यात्रियों को बसों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।
शहर में इस समय कुल 150 बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं। इन बसों के माध्यम से हजारों यात्रियों को रोजाना परिवहन सुविधा मिल रही है। लोगों का कहना है कि नए गुरुग्राम, सोहना, पटौदी और मानेसर को जोड़ने की आवश्यकता है। इससे देखते हुए गुरुग्राम महानगर परिवहन प्राधिकरण द्वारा लगातार बस रूटों में सुधार करने की कोशिश की जा रही है। सिटी बस सर्विस के विस्तार से आम लोगों, छात्रों, उद्योगों में काम करने वालों और स्थानीय व्यवसायों को लाभ मिलेगा।
मैं रोजाना सिटी बस से सफर करता हूं। सिटी बस से जितनी दूरी 10 से 15 रुपये में तय हो जाती है। ऑटो से 50 रुपये से अधिक राशि खर्च करनी पड़ती है। - भीम सिंह, गुड़गांव।
मुझे रोजाना अपने काम के चक्कर में 10 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। जिस दिन सिटी बस मिल जाती उस दिन मैं अपने भाग्यशाली समझता हूंं। - अमन, वजीराबाद।