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भ्रष्टाचार का अड्डा बना नगर निगम

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गुरुग्राम। शहर के विकास के लिए करीब 14 साल पहले गुरुग्राम नगर निगम का गठन हुआ, लेकिन निगम जनसेवा की बजाय भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया। यहां के अधिकांश अधिकारी विकास कार्यों की आड़ में कमाई करने में जुटे हैं। इसकी गवाही प्रदेश विजिलेंस और खुद निगम की विजिलेंस विंग दे रही है।
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विजिलेंस के पास प्रदेश भर में भ्रष्टाचार की कुल 1040 में से 74 शिकायतें गुरुग्राम नगर निगम की हैं। इनसे अलग 50 से अधिक शिकायतों की जांच निगम की खुद की विजिलेंस विंग कर रही है। बताया जाता है कि इनमें से 18 की जांच पूरी हो गई है। जांच में कुछ अधिकारियों पर आरोप सिद्ध हो गए हैं। इसकी रिपोर्ट निगमायुक्त को सौंपी जा चुकी है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही अब अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होगी। अहम बात यह है कि ये सभी कार्यकारी अभियंता (एक्सईएन) स्तर के हैं। इस स्तर पर भ्रष्टाचार की जड़ें फैली हैं तो निचले स्तर पर भ्रष्टाचार की क्या सीमा होगी, सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। सभी शिकायतें साल 2019 से 2022 की बताई जा रही है।
मुख्य सचिव ने लिया संज्ञान
लगातार भ्रष्टाचार की शिकायतों का प्रदेश के मुख्य सचिव ने संज्ञान लिया है। उन्होंने नगर निगम से शिकायतों की जांच की स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। इसके बाद से निगम में खलबली मची है। प्रदेश विजिलेंस के साथ निगम की विजिलेंस विंग की जांच रिपोर्ट के बाद क्या कार्रवाई हुई, शिकायतों की कितनी जांच हुई, मुख्य सचिव ने इन सबकी स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।
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74 में से 8 की जांच पूरी
विजिलेंस के पास जो 74 शिकायतें आईं, उनमें से केवल 8 की जांच पूरी हो पाई है। इससे भ्रष्टाचार के खिलाफ निगम के उच्चाधिकारियों की गंभीरता का पता चलता है। इनमें से 52 की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। 10 मामले ऐसे हैं, जिनकी प्रति निगम को प्राप्त नहीं होने की बात कही जा रही है। चार मामले निगम से संबंधित नहीं हैं।
फरीदाबाद में लगातार कार्रवाई के बाद मची खलबली
भ्रष्टाचार के मामलों में फरीदाबाद नगर निगम में अधिकारियों पर दोष सिद्ध होने के बाद हो रही लगातार कार्रवाई से गुरुग्राम निगम में खलबली मची है। उम्मीद जताई जा रही है कि देर-सवेर काली कमाई करने वाले अधिकारी जरूर नपेंगे। निगम पार्षद सुभाष सिंगला कहते हैं कि निगम में भ्रष्टाचार का एक मामला नहीं है, सबसे बड़ा तो विज्ञापन घोटाला है। बैठकों में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया जाता है, जांच और कार्रवाई की मांग भी की गई है, लेकिन होता कुछ नहीं है।
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