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मनरेगा: कागजों में फावड़ा चला रहे मजदूर, धरातल पर मशीनों से हो रहा काम

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कुछ गांव तो ऐसे हैं, जिनमें कागजों में रास्ते बनाकर पेमेंट तक निकाल ली गई
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मोहम्मद मुस्तफा
पिनगवां। प्रदेश के पिछड़े जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना के तहत सरकार और अधिकारी भले ही ग्रामीण परिवारों को सौ दिन का रोजगार देने का दावा कर रहे हों, लेकिन धरातल पर मामला कुछ अलग है। यहां कागजों में तो मजदूर खूब तेजी से फावड़ा चलाकर मजदूरी कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर मजदूरों का काम जेसीबी मशीन और ट्रैक्टरों से कराया जा रहा है।
यह मामला किसी एक गांव का नहीं है, बल्कि जिले के अधिकतर गांवों का यही हाल है। इस मामले को लेकर सबसे ज्यादा सुर्खियों में नगीना और पिनगवां ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले गांव हैं। मजदूरों को इस मामले की भनक तक नहीं है कि वह कागजों में फावड़ा भी चला रहे हैं। लेकिन मनरेगा की साइड पर विजिट करने से इस मामले में बड़ा खुलासा हो सकता है। इतना ही नहीं, कुछ गांव तो ऐसे हैं, जिनमें कागजों में रास्ते बनाकर पेमेंट तक निकाल ली गई है, जबकि जमीनी स्तर पर लोग इंतजार कर रहे हैं कि शायद इस बार उनका रास्ता बनेगा। इस खेल में न केवल गांव का सरपंच अकेला शामिल होता है बल्कि ठेकेदार से लेकर एबीपीओ, जेई, बीडीपीओ, अकाउंटेंट, बैंकों के मैनेजर तक शामिल बताए जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो यह खेल सांठगांठ से खेला जा रहा है। इसमें संलिप्त हर व्यक्ति को बस अपने कमीशन की फिक्र है।
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गौरतलब है कि नूंह जिला पिछली बार भी मनरेगा घोटाले को लेकर सुर्खियों में रहा था। जब अधिकारियों ने इसकी जांच की थी तो मामले का पर्दाफाश हुआ था। जिसमें कई गांवों के सरपंच, एबीपीओ पर मुकदमा दर्ज हुआ था। जिनमें से कई एबीपीओ तो घर बैठ गए, लेकिन कई जुगाड़ लगाकर बहाल हो गए और फिर से अपने मिशन में पहले की तरह ही लग गए। मनरेगा योजना की जानकारी उपलब्ध कराने वाली साइट में इस बार अलग तरीके से फेर बदल किया गया है। बताया जा रहा है कि ऐसा इसलिए किया गया है, ताकि हर व्यक्ति कामकाजों की जानकारी न ले सके। इसका फायदा उठाकर सरपंच और ठेकेदार कागजों में काम दिखाकर मजदूरों के हक पर डाका डालने का काम कर रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों को इस मामले पर गौर करने की जरूरत है।
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यह मामला संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा किया जा रहा है तो वह बिल्कुल गलत है। इस बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। जिन गांवों में ऐसा किया जा रहा है, उनकी जांच करके कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। -रविंद्र चौहान, लोकपाल जिला नूंह
चित्र परिचय: 1, मनरेगा योजना के मजदूर
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