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Gurugram News: परिवार का बहिष्कार होने पर मानसिक रूप से परेशान कांस्टेबल ने की आत्महत्या

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कैबिनेट मंत्री के घर पर तैनात थे, झज्जर के भूरावास गांव के रहने वाले थे
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रात को जहरीले पदार्थ का किया सेवन, गार्ड रूम में बेहोशी की हालत में मिले
भतीजे द्वारा गांव की लड़की से शादी करने पर पंचायत ने किया था बहिष्कार

अमर उजाला ब्यूराे
गुरुग्राम। सिविल लाइंस स्थित कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह के घर की सुरक्षा में तैनात एक कांस्टेबल जगबीर सिंह ने गार्ड रूम में सोमवार रात जहरीले पदार्थ का सेवन करके आत्महत्या कर ली। गांव में परिवार का बहिष्कार होने से जगबीर सिंह मानसिक रूप से परेशान चल रहे थे। सोमवार की रात करीब 2.30 बजे एक पुलिसकर्मी गार्ड रूम में अंदर आया तो कांस्टेबल जगबीर सिंह को अचेत अवस्था में देखा। सहकर्मी ने तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को इसके बारे में सूचना दी। जब जगबीर सिंह को अस्पताल में लेकर गए तो डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया था।
मृतक जगबीर सिंह झज्जर जिले के भूरावास गांव का निवासी था और वर्ष 2024 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद कैबिनेट मंत्री बनने पर राव नरबीर सिंह के घर पर सुरक्षा में तैनात किया गया था। मंगलवार को शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया। मृतक कांस्टेबल जगबीर सिंह के परिजनों ने गुरुग्राम के सिविल लाइंस थाने में भूरावास गांव के सुरेंद्र, अनुज, नीलम, जयभगवान, सुनील, कपिल, सुमित के खिलाफ शिकायत दी है। परिवार वालों ने इन लोगों पर जगबीर को प्रताड़ित करने के आरोप भी लगाए हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि कांस्टेबल जगबीर सिंह अपने भतीजे के गांव की एक लड़की से शादी करने पर पंचायत द्वारा उनके परिवार का बहिष्कार करने से मानसिक रूप से परेशान चल रहे थे।
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जानकारी के अनुसार, जगबीर सिंह (49 वर्ष) वर्ष 2014 में हरियाणा पुलिस में बतौर कांस्टेबल भर्ती हुए थे। इससे पहले वे आर्मी में जाट रेजीमेंट में तैनात रह चुके थे। आर्मी से सेवानिवृत होने के बाद हरियाणा पुलिस में नियुक्त हुए थे। पुलिस जांच में सामने आया है कि कांस्टेबल जगबीर सिंह के भतीजे ने करीब चार माह पहले गांव की एक लड़की से बिना बताए शादी कर ली थी। इसी वजह से भूरावास गांव के लोगों ने पिछले सप्ताह पंचायत करके जगबीर सिंह के परिवार का बहिष्कार कर दिया था। बहिष्कार होने से गांव के लोगों ने उनके परिवार वालों से बोलचाल बंद की हुई है, जिस कारण वह मानसिक रूप से परेशान चल रहे थे। बताया जा रहा है कि भूरावास गांव की पंचायत द्वारा बहिष्कार के फैसले को वापस लेने के लिए दो दिन पहले ही जगबीर सिंह गांव गए थे और पंचायत व ग्रामीणों से माफी भी मांगी थी लेकिन गांव में मामले का कोई समाधान नहीं निकलने के कारण कांस्टेबल जगबीर सिंह ने जहरीले पदार्थ का सेवन करके आत्महत्या कर ली। पुलिस का कहना है कि जगबीर सिंह के पास कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। वहीं, पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों के अनुसार जगबीर सिंह ने सल्फास का सेवन किया था, जिससे उसकी मौत हुई।

नाम बदलकर नौकरी करने के लगे आरोप
कांस्टेबल जगबीर सिंह के खिलाफ झज्जर के एक थाने में नाम बदलकर नौकरी करने के आरोप लगाते हुए शिकायत दी गई थी। शिकायत में बताया गया है कि वह जगबीर सिंह नहीं दयानंद है और उसने अपने भाई के नाम पर आर्मी में नौकरी हासिल की थी। मामले में जगबीर सिंह को 20 सितंबर को थाने में भी बुलाया गया था। जगबीर सिंह ने थाने में बयान दर्ज कराए थे कि वही जगबीर है और उसी ने 10वीं कक्षा पास की थी। हालांकि पहले उसका नाम दयानंद था और बाद में अपना नाम बदलकर जगबीर सिंह करवाया था। उसी आधार पर उसकी आर्मी में नौकरी लगी थी। थाने में जगबीर सिंह से नाम बदलवाने से संबंधित दस्तावेज भी मांगे गए थे। ऐसे में जगबीर सिंह ने थाने में कहा था कि वह दस्तावेज ढूंढकर जमा करवा देगा। पुलिस उस मामले में भी छानबीन कर रही थी।
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शिकायत के आधार पर कई लोगों पर एफआईआर दर्ज : पुलिस
सिविल लाइंस थाने से निरीक्षक कृष्ण कुमार ने बताया कि कांस्टेबल द्वारा आत्महत्या मामले में पुलिस विभिन्न बिंदुओं के आधार पर छानबीन कर रही है। मृतक के परिवार वालों की शिकायत के आधार पर कई लोगों के खिलाफ धारा 108, 3 (5) बीएनएस के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। अभी तक जांच में मृतक के भतीजे द्वारा गांव की लड़की से शादी करने और पंचायत द्वारा परिवार का बहिष्कार किए जाने से वह परेशान था।
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