चार जिलों के सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत नहीं शुरू हुआ इलाज
सौम्या गुप्ता
गुरुग्राम। प्रदेश के चार जिलों के सरकारी अस्पतालों में पीपीपी मोड पर चल रहे आयुष्मान योजना के तहत मेडिट्रिना हार्ट सेंटरों में नौ महीने बाद भी इलाज शुरू नहीं हुआ है। राज्य के पंचकूला, अंबाला, गुरुग्राम और फरीदाबाद में ये सेंटर संचालित हैं। जहां सामान्य मरीजों का इलाज तो जारी है लेकिन आयुष्मान श्रेणी के लाभार्थियों का अब तक इलाज बंद है।
जानकारी के अनुसार, इन चारों अस्पतालों पर सरकार की ओर से करीब चार करोड़ 50 लाख रुपये से अधिक की राशि बकाया है। भुगतान लंबित रहने के कारण मेडिट्रिना हार्ट सेंटर प्रबंधन ने आयुष्मान योजना के मरीजों का इलाज शुरू नहीं किया है। वहीं गुरुग्राम में बीते नौ माह से इलाज बंद है। इस संबंध में सेंटर प्रबंधन की ओर से कई बार संबंधित विभाग को पत्र लिखकर बकाया भुगतान जारी करने की मांग की गई लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आगामी चार मई को एक बैठक प्रस्तावित है, जिसमें संबंधित अधिकारी और मेडिट्रिना प्रबंधन भाग लेंगे। इस बैठक में बकाया भुगतान और आयुष्मान मरीजों के इलाज को लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
सबसे अधिक बकाया अंबाला में
सबसे अधिक बकाया अंबाला में है, इसके बाद फरीदाबाद का स्थान है। भुगतान न मिलने के कारण मेडिट्रिना प्रबंधन को गंभीर आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, आयुष्मान योजना के मरीजों का इलाज शुरू न होने से उनकी परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। स्थिति के चलते स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं और मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।
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जिला रुपये बकाया
पंचकूला 30 लाख रुपये
अंबाला 2 करोड़ से अधिक रुपये
गुरुग्राम 60 लाख रुपये
फरीदाबाद 1.5 करोड़ रुपये
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निजी अस्पतालों का लिया सहारा
इस रोक से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रभावित हुई है। आयुष्मान भारत योजना के तहत इस केंद्र में हृदय संबंधी प्रक्रियाओं का खर्च 60,000-65,000 रुपये होता है। अब योजना के तहत प्रवेश बंद होने से मरीजों को निजी अस्पतालों या अन्य जिलों में जाना पड़ रहा है, जिससे उनका आर्थिक बोझ और परेशानी बढ़ गई है।
वर्जन
राज्य में चारों मेडिट्रिना हार्ट सेंटर में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज बंद है। लगभग 4.5 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। इसके लिए कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। मरीजों को इलाज में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। -
प्रदीप शेनॉय, मेडिट्रिना हार्ट सेंटर, मुख्य वित्तीय अधिकारी