गुरुग्राम। 23 अगस्त को सड़क दुर्घटना में हुई मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) आलोक गुप्ता की मौत के मामले में शनिवार को परिजनों समेत सैकड़ों लोगों ने शांतिपूर्वक मार्च निकाला। परिजनों का आरोप है कि पुलिस मामले में न तो उचित धाराएं लगा रही है और न ही आरोपी जुवेनाइल के पिता को गिरफ्तार कर रही है।
पुलिस कार्रवाई से नाखुश परिजनों ने सैकड़ों लोगों के साथ डीटी मेगा मॉल के बाहर से मार्च शुरू किया। यह मार्च साइबर सिटी में घटना स्थल तक पहुंचा। यहां करीब 15 मिनट तक लोगों ने रेपिड मेट्रो स्टेशन के पास सड़क पर डेरा डालते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की।
आलोक के भाई अनुराग गुप्ता व पत्नी मिहिका ने बताया कि पुलिस दबाव में आकर कार्रवाई नहीं कर रही है। मामले में कार चला रहे जुवेनाइल समेत कार के मालिक व जुवेनाइल के पिता भी बराबर के दोषी हैं। नाबालिग को गाड़ी देना, बिना लाइसेंस व शराब पीकर गाड़ी चलाना संगीन अपराध है, लेकिन पुलिस ने गैर इरादतन हत्या के मामले में केस दर्ज किया है। उन्होंने बताया कि जानकारी मिली है कि जुवेनाइल अपने दोस्त की जन्मदिन की पार्टी करके सुबह करीब 4 बजे गाड़ी लेकर निकला था। यह गाड़ी दोस्त के पिता ने उसे दी थी। नशे में धुत होकर वह ढाई घंटे तक शहर की सड़कों पर गाड़ी को दौड़ाते रहे। सुबह करीब साढ़े छह बजे उनकी गाड़ी साइबर हब में डिवाइडर से कूदती हुई सड़क की दूसरी तरफ आई और हार्ले डेविडसन बाइक पर जा रहे अलोक गुप्ता से टकरा गई। घटना में आलोक की मौत हो गई थी। आरोप है कि इस मामले में थाना प्रभारी समेत पुलिस आयुक्त से भी गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर फाइल को दबाया जा रहा है।
ऑनलाइन छेड़ी मुहिम
मिहिका ने बताया कि उन्होंने अपने पति को न्याय दिलाने के लिए ऑनलाइन मुहिम छेड़ी है। सोशल मीडिया पर ‘हैशटैग जस्टिस फॉर आलोक’ व ‘हैशटैग जुवेनाइल ड्राइविंग’ से लोगों को अपने साथ जोड़ा है। इस मुहिम के जरिए ही यह लोग आलोक को न्याय दिलाने के लिए सड़कों पर उतरे हैं।