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स्ट्रीट वेंडिंग घोटाले में फंस सकते हैं कई पूर्व अधिकारी

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गुरुग्राम। नगर निगम के स्ट्रीट वेंडिंग घोटाले में निगम प्रशासन की तरफ से कराई जा रही आंतरिक जांच रिपोर्ट निगमायुक्त को मिल गई है। बताया जा रहा है कि जांच के दौरान निगम के कई पूर्व व वर्तमान अधिकारियों की कार्यशैली संदेह के घेरे में हैं। इसमें से कई लोगों का तो जिले से स्थानांतरण भी हो चुका है। निगम की आंतरिक जांच में मुख्य रूप से 3-4 अधिकारियों का नाम सामने आ रहा है। इनकी प्रत्यक्ष या फिर परोक्ष रूप से मिलीभगत व लापरवाही के कारण एजेंसियों को इतने बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी करने का मौका मिला।
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कहा ये भी जा रहा है कि पूर्व नगर निगम आयुक्त विनय प्रताप सिंह ने भी मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया और जानबूझकर पूरे मामले की अनदेखी करते रहे। नतीजा यह रहा कि अधिकारियों व एजेंसियों की मिलीभगत से नगर निगम को करोड़ों का राजस्व नुकसान उठाना पड़ा। हैरत की बात यह भी है कि करीब 2 साल बाद भी इस पूरे गड़बड़झाले की जांच पूरी नहीं हो सकी। ऐसे में एंजेसियों से रिकवरी की बात भी बेमानी साबित होती है। निगम की विजिलेंस विंग ने भी संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर एजेंसियों का पूरा रिकॉर्ड मांगा था।
यह था मामला :
नगर निगम ने 2016 में शहर में व्यवस्थित तरीके से स्ट्रीट वेंडिंग जोन बनाने का काम शुरू किया था। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर रेहड़ी-पटरी वालों को बाजार में जगह देकर एक पूरा जोन बनाया जाना था। इसके लिए तीन एजेंसियों को निगम की तरफ से नियुक्त किया गया था लेकिन 2019 में वर्क ऑर्डर खत्म होने के डेढ़ साल बाद भी एजेंसियां रेहड़ी वालों से पैसे की उगाही करती रहीं। एजेंसियों ने निगम प्रशासन की बिना अनुमति के करोड़ों रुपये की उगाही की और पैसे भी नगर निगम में नहीं जमा कराए।
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2016 से 2019 के लिए नियुक्त
नगर निगम ने 2016 में 20 सितंबर 2016 से 19 सितंबर 2019 तक के लिए लिओ मीडियाकाम, एग्मैक और एसएसपीएल समेत तीन एजेंसियों को स्ट्रीट वेंडिंग परियोजना में वित्तीय कामकाज की जिम्मेदारी दी थी। एजेंसियों को प्रति रेहड़ी मासिक तौर पर 1500 रुपये वसूलने के लिए अधिकृत किया गया था, जिसमें से 500 रुपये प्रति रेहड़ी नगर निगम में जमा कराया जाना था। निगम से प्राप्त जानकारी के मुताबिक एजेंसियों को नगर निगम में 6.98 करोड़ रुपये जमा कराने थे, लेकिन निगम के खाते में सिर्फ 31 लाख 51 हजार रुपये ही जमा कराए गए।
निगम को किया गुमराह
नगर निगम ने कुल 3452 रेहड़ियां लगाने का वर्क आर्डर तीनों एजेंसियों को सौंपा था। निगम की आंतरिक जांच में 3452 में से सिर्फ 1620 रेहड़ियों की ही जानकारी मिल सकी। इसमें से सेक्टर 23, 56, 14, 32 समेत अन्य सेक्टरों में इन एजेंसियों की रेहड़ियां चल रही थीं। अब भी बड़ी संख्या में इन्हीं सेक्टरों में रेहड़ियां चल रही हैं, जिसमें से अधिकांश का निगम के रिकॉर्ड में कोई जानकारी नहीं है लेकिन नवागत निगमायुक्त मुकेश कुमार आहुजा विभागीय अधिकारियों को इनकी पारदर्शी तरीके से समीक्षा कर रिपोर्ट सौंपने के आदेश दे चुके हैं। खास बात यह है कि वर्क आर्डर खत्म होने के डेढ़ साल बाद तक ये एजेंसियां रेहड़ी वालों से उगाही करती रहीं।
मेरे पास विजिलेंस की कोई रिपोर्ट नहीं आई है। निगम की आंतरिक जांच की रिपोर्ट आ गई है, उसका विस्तृत अध्ययन कर रहा हूं। इस बारे में अभी ज्यादा कुछ कहना जल्दबाजी होगी लेकिन इतना तय है कि जो भी अधिकारी इसमें दोषी हैं। उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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- मुकेश कुमार आहुजा, निगमायुक्त
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