भारत से अपने साथियों के माध्यम से रुपये मंगवा रहा था
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। पांच लाख का इनामी बदमाश मैनपाल बादली भारत से अपने साथियों के माध्यम से रुपये मंगवा रहा था। इस रुपये से उनसे कंबोडिया के सिएम रीप में रहकर डिस्कोथेक के नाम से रेस्टोरेंट और बार का बिजनेस शुरू किया। वहीं, कंबोडिया की एक महिला के साथ सहमति संबंधों में रहने लगा और उसके तीन बच्चे भी हैं। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि कंबोडिया जाने के बाद उसने भारत में किसी से भी संपर्क नहीं किया। वहां कोई भी नहीं जानता था कि वह मैनपाल है। वहां उसने अपनी पहचान सोनू कुमार के नाम से बनाई हुई थी। फर्जी पासपोर्ट के आधार पर वह इंडोनेशिया, थाईलैंड सहित अन्य कई देशों में जा चुका है।
चाचा की हत्या का बदला लेने के लिए अपराध की दुनिया में रखा कदम
झज्जर जिले के बादली गांव में एक साधारण परिवार में जन्मा मैनपाल शुरुआती दिनों में ट्रैक्टर मैकेेनिक था। वर्ष 2000 में मैकेनिक का काम छोड़कर उसने अपराध की दुनिया में कदम रख दिया था। अपने चाचा की हत्या के बाद बदला लेने के लिए अपराध की दुनिया में कूद गया और उसने हत्या, हत्या का प्रयास सहित कई अन्य आपराधिक वारदातों को अंजाम दिया।
22 मामलों में से तीन में हो चुकी है उम्रकैद
आरोपी मैनपाल पर हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, डकैती सहित अन्य धाराओं के तहत 22 मामले दर्ज हैं। वर्ष 2007 में की गई दो हत्याओं के मामले में उसे उम्रकैद की सजा हो चुकी है। वहीं, वर्ष 2010 में की गई एक अन्य हत्या के मामले में भी उम्रकैद की सजा हो चुकी है। कई बार उसकी पैरोल की अर्जी खारिज की गई लेकिन 17 जुलाई 2018 को हिसार सेंट्रल जेल से छह सप्ताह की पैरोल मिलने पर वह जेल से बाहर आ गया। पैरोल का समय पूरा होने के बाद भी वह वापस जेल नहीं लौटा और फर्जी दस्तावेज बनवाकर भारत छोड़कर विदेश भाग गया था। 30 अक्तूबर 2019 को मैनपाल को बहादुरगढ़ की न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने पीओ घोषित कर दिया था।
सोनू कुमार के नाम से फर्जी दस्तावेज बनवाए थे
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि मैनपाल ने सरहोल गांव के दिए गए पते पर सोनू कुमार के नाम से फर्जी दस्तावेज बनवाए थे। जब पुलिस ने जांच की गई तो पता चला कि उस पते पर या आसपास सोनू कुमार नाम का कोई व्यक्ति नहीं रह रहा था। उसने फर्जी दस्तावेज तैयार किए और इन्हीं दस्तावेज के आधार पर पासपोर्ट बनवाया था। इस संबंध में सेक्टर-17/18 थाने में एफआईआर संख्या 187/2019 दर्ज की गई थी। इसमें धाराएं 420, 467, 468, 471, 120बी आईपीएस और धारा 12(1) पासपोर्ट अधिनियम शामिल की गईं थी।
इन मामलों में हुई थी उम्रकैद
बहादुरगढ़ सदर थाने में एफआईआर नंबर 276/2007 में धारा 302, 149, 307, 148, 120बी आईपीसी के तहत उम्रकैद व 70 हजार रुपये जुर्माना की सजा। बहादुरगढ़ सदर थाने में एफआईआर नंबर 296/2007 में धारा 148, 149, 120बी, 302 आईपीसी के तहत उम्रकैद व 60 हजार रुपये जुर्माना की सजा। बहादुरगढ़ सदर थाने में एफआईआर नंबर 218/2010 में धारा 302, 307, 120बी आईपीसी के तहत उम्रकैद व 20 हजार रुपये जुर्माना की सजे। हरियाणा पुलिस ने 25 अक्तूबर 2018 को पांच लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।
मैनपाल बादली जेल में हत्या किए जाने के मामले में अदालत से भगोड़ा घोषित है। हरियाणा पुलिस ने भी आरोपी की गिरफ्तारी पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित किया है। जेल में हत्या किए जाने के मामले में उसके दो अन्य साथियों पर ट्रायल पूरा हो चुका है और उन्हें सजा भी हो चुकी है। मैनपाल फरार था, ऐसे में उस पर ट्रायल चलेगा।
- सतीश बालन, आईजी, एसटीएफ हरियाणा