गुरुग्राम। कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी आते ही मरीजों के इलाज के लिए बनाए गए अस्थायी अस्पताल पूरी तरह खाली पड़े हुए हैं। नतीजा यह है कि अब प्रवेश द्वार पर ताले लटकने लगे हैं। हालांकि, शुरुआत से ही इन अस्थायी अस्पतालों में मरीजों की संख्या कम ही रही थी लेकिन अब ये बिल्कुल खाली पड़े हैं। वहीं, डॉक्टरों व कर्मचारियों के मुताबिक कीमती सामान चोरी होने के डर से इन्हें बंद किया गया है।
सेक्टर-14 स्थित राजकीय कन्या महाविद्यालय में बनाए गए अस्थायी अस्पताल का 17 मई को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने उद्घाटन किया था। तब से ही यहां पर मरीजों की संख्या ज्यादा नहीं थी। अब स्थिति यह है कि अस्पताल में एक भी मरीज भर्ती नहीं है, जिसके चलते अस्पताल के प्रवेश द्वार पर ताला लगा दिया गया है। अस्पताल में मौजूद डॉक्टर हितेश ने बताया कि पिछले दिनों एक मरीज आया था, लेकिन उसकी हालत गंभीर थी। बाद में उसे ताऊ देवीलाल स्टेडियम में बने अस्थायी अस्पताल के आईसीयू वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि यहां पर ऑक्सीजन कन्संट्रेटर, ऑक्सीमीटर समेत अन्य कीमती सामान रखे हुए हैं। जिनकी सुरक्षा काफी जरूरी है।
6 मई से सुधरे हालात
अप्रैल की शुरुआत से मई के पहले सप्ताह तक जिले में हाहाकार की स्थिति रही। इस अवधि में कोरोना संक्रमण चरम पर था और लोग बिना ऑक्सीजन के अस्पतालों में दम तोड़ रहे थे। इसके बाद ही इन अस्थायी अस्पतालों के बनाए जाने की योजना बनी थी, लेकिन जब तक इनको शुरू किया गया, स्थिति काबू में आनी शुरू हो गई। जिले में 6 मई को कोरोना अपने चरम पर था और उसके अगले ही दिन से स्थिति सुधरने लगी। उसके बाद तो तेजी से मरीजों को छुट्टी मिलने लगी और अस्पताल भी खाली होने लगे। अब रोजाना जिले में आने वाले नए मरीजों के मुकाबले स्वस्थ होने वालों की संख्या ज्यादा रहती है। जिले में तीन अस्थायी अस्पतालों में मरीजों के लिए 500 बेड की व्यवस्था की गई लेकिन अधिकांश अस्पताल खाली पड़े हैं। वहीं, कोरोना संक्रमण की स्थिति यह है कि जिले में अब महज 1073 सक्रिय मरीज हैं, जबकि कुल 1 लाख 80 हजार 115 मरीजों में से 1 लाख 78 हजार 206 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं।