संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। गांधी कॉलोनी में फर्जी आधार-पैन कार्ड के जरिए बैंक से लोन लेने वाले गैंग का मंगलवार को मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने खुलासा किया है। मौके से टीम ने सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक की फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक मोहर के साथ, सिम, लोन प्रार्थनापत्र के साथ अन्य सामान बरामद किया है। टीम ने मौके से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से दो सगे भाई हैं। आरोपियों की पहचान नई दिल्ली निवासी नितिन, अमन गुप्ता और सचिन गुप्ता के रूप में हुई है।
मुख्यमंत्री उड़नदस्ते टीम की शिकायत पर शिवाजी नगर थाना पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। नितिन ने पूछताछ में बताया कि करीब एक साल से वह फर्जी दस्तावेज बनाकर विभिन्न बैंकों से लोन लेने का काम कर रहे थे।
मुख्यमंत्री उड़नदस्ते में तैनात एसआई मदन सिंह ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि गांधी कॉलोनी में एक दुकान में और खांडसा रोड पर मंडी के पास मोबाइल की दुकान पर फर्जी आधार कार्ड व पैन कार्ड बनाए जाते है। टीम ने पालम विहार अपराध शाखा के साथ मौके पर रेड की तो मौके पर दिल्ली निवासी नितिन मिला। दुकान से एक लैपटॉप, प्रिंटर के साथ 15 फर्जी आधारकार्ड, 24 पैन कार्ड, 10 सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक के डेबिट कार्ड, 24 मोबाइल सिम के साथ अन्य लोन लेने के लिए इस्तेमाल में आने वाले कागजात बरामद हुए।
इस तरह लेते थे लोन
नितिन ने बताया कि गांधी नगर निवासी सचिन गुप्ता अपने भाई अमन गुप्ता के साथ मिलकर फर्जी कागजात तैयार करता है। खांडसा मंडी के पास श्याम कम्युनिकेशन इलेक्ट्रानिक्स व मोबाइल फोन की दुकान किराए पर लेकर फर्जी कागजात तैयार करते हैं। पहले वह फर्जी दस्तावेज के जरिए नंबर लेते हैं और उसके बाद सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक में खाता खोल लिया जाता है। इसके बाद उन खाते पर तीन से पांच लाख रुपये तक लोन लेकर फर्जीवाड़ा करते हैं। टीम को मौके पर एक ही व्यक्ति के नाम से अलग-अलग मोबाइल नंबर व फर्जी आधार-पैन कार्ड मिले। आरोपी इन कागजातों से मोबाइल सिम लेकर सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक में खाता खोल लेते थे और दूसरे बैंकों से लोन लेते थे। लोन लेने के बाद आरोपी दो या तीन किस्त भरकर बाद में किस्त भरना बंद कर देते थे। इस तरह आरोपी अब तक विभिन्न बैंकों से फर्जी दस्तावेज पर लाखों रुपये का लोन ले चुके हैं।
बैंक अधिकारी भी जांच के घेरे में
मुख्यमंत्री उड़नदस्ता टीम ने इस पूरे फर्जीवाड़े में बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत होने की भी संभावना जताई है। मामले के जांच अधिकारी का कहना है कि बिना किसी बैंक कर्मी की मिलीभगत के एक ही व्यक्ति बार-बार अपना नाम पता और कागजात बदलकर लोन नहीं ले सकता। ऐसे में बैंक कर्मचारियों की भी जांच की जा रही है।