लहरवाड़ी स्कूल के तीन जर्जर कमरों की छतें और दीवारें गिरने से कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
संवाद न्यूज एजेंसी
पुन्हाना। लहरवाड़ी गांव स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राओं की जान पर हमेशा संकट मंडराता रहता है। विद्यालय के नौ कमरों में से तीन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। इन कमरों की छतें और दीवारें इतनी कमजोर हो चुकी हैं कि कभी भी गिर सकती हैं। इसके बावजूद इन खस्ताहाल कमरों में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा विभाग इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहा है और मानो किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
लोक निर्माण विभाग की रिपोर्ट में भी इन कमरों को खतरनाक करार दिया गया है। स्कूल प्रशासन ने विभागीय अधिकारियों की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि ये कमरे लगभग 15 से 20 साल पुराने हैं। इनकी छत की आरसीसी स्लैब टूट चुकी है, लोहे की सरिये जंग खा चुके हैं। दीवारें ईंट-पत्थर की बनी हैं जो कई जगहों से टूटकर गिर चुकी हैं। फर्श भी जगह-जगह से उखड़ चुका है। खिड़कियां और दरवाजे टूटे हुए या गायब हैं। समग्र हालत बेहद खराब और उपयोग योग्य नहीं है।
स्कूल प्रशासन ने इस संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कई बार लिखित रूप से अवगत कराया है। हाल ही में जिला शिक्षा अधिकारी नूंह को भेजे पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि इन कमरों को मरम्मत या तोड़ने की तुरंत आवश्यकता है। इसपर भी शिक्षा विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी फाइलों में पत्राचार करने तक सीमित हैं, जबकि बच्चों की सुरक्षा दांव पर लगी हुई है।
अधिकारियों के रवैये से ग्रामीणों में रोष
लहरवाड़ी गांव निवासी पंचायत सदस्य इरशाद, शोराब, जान मोहम्मद, अजहरुद्दीन, मुस्ताक, फरहान, ताहिर आदि ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में आसपास के छह से ज्यादा गांवों के सैकड़ों बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। जर्जर कमरों को लेकर वे कई बार शिक्षा विभाग और प्रशासन के समक्ष गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई और कोई हादसा हुआ तो इसकी जिम्मेदारी सीधे विभागीय अधिकारियों की होगी।
बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित
कमरों की जर्जर स्थिति के कारण विद्यालय में कक्षाओं की समस्या और बढ़ गई है। एक-एक कमरे में कई कक्षाओं को साथ-साथ पढ़ाना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ पढ़ाई का स्तर प्रभावित हो रहा है बल्कि बच्चों में असुरक्षा का डर भी बना रहता है। ग्रामीणों और अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि इन जर्जर कमरों को तुरंत बंद कराया जाए और नई कक्षाओं का निर्माण करवाया जाए, ताकि बच्चे सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त कर सकें।
कमरों को अगर लोक निर्माण विभाग ने खंडहर घोषित कर दिया है तो जल्द ही इन कमरों को तोड़ने की प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी और नए कमरों के निर्माण के लिए विभाग को लिखा जाएगा।
सगीर अहमद, उप जिला शिक्षा अधिकारी नूंह