जीएमडीए ने बादशाहपुर ड्रेन में हेयर रीसाइक्लिंग प्रोजेक्ट का किया ट्रायल
मनोज धर द्विवेदी
गुुरुग्राम। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) तीनों प्रमुख नालों के पानी को बेहतर करने की योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत नालों में गिर रहे अवैध सीवर कनेक्शनों को बंद कराया जा रहा है।
वहीं, पायलट प्रोजेक्ट के तहत लेग 3 नाले (बादशाहपुर) में हेयर रीसाइक्लिंग प्रोजेक्ट सफल रहा है। नाले में पहली बार मानव बाल से बने फ्लोटिंग बैरियर के साथ हेयर फिल्टर से पानी की गुणवत्ता में सुधार किया गया है। साइबर सिटी में बरसाती पानी निकासी के तीन प्रमुख प्राकृतिक नाले हैं। इसमें लेग 1 ड्रेन (सिकंदरपुर से पालम विहार वाया नजफगढ़), लेग 2 (सेक्टर 42 हुडा सिटी सेंटर से नजफगढ़) और लेग 3 ड्रेन (घाटा गांव से वाटिका चौक, हीरो होंडा चौक, सेक्टर 99 से नजफगढ़ ड्रेन) जिसे बादशाहपुर ड्रेन भी कहा जाता है। तीनों नालों से बारिश का पानी नजफगढ़ ड्रेन से होकर यमुना नदी में जाता है।
नाले के पानी को बेहतर करने के लिए कार्रवाई चल रही है। इसके लिए नाले के पानी साफ करने के लिए तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। केशकंबली फाउंडेशन के हेयर रीसाइक्लिंग प्रोजेक्ट को बादशाहपुर नाले में सेक्टर 37 के पास पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लगाया गया। यह गुरुग्राम के नाले में पहली बार मानव बाल से बने फ्लोटिंग बैरियर विद हेयर फिल्टर्स से पानी की गुणवत्ता बढ़ाने की पहल है। इसके तहत पानी के बीओडी 140 से घटकर 83 तक लाया गया है।
जीएमडीए के कार्यकारी अभियंता विक्रस सिंह ने बताया कि हेयर रीसाइक्लिंग प्रोजेक्ट का ट्रायल किया गया है। उन्होंने बताया कि इससे पानी के बीओडी में सुधार देखा गया है। कंपनी से इस प्रोजेक्ट के बारे में पूरी जानकारी मांगी गई है। सीईओ के सामने इसकी पूरा ब्योरा दिया जाएगा। यदि सीईओ की मंजूरी मिली तो आगे कदम उठाया जाएगा। केशकंबली फाउंडेशन के राहुल गुप्ता ने बताया कि हेयर रीसाइक्लिंग प्रोजेक्ट में मानव बाल से बने फ्लोटिंग बैरियर विद हेयर फिल्टर्स का इस्तेमाल किया जाता है। उसे नाले में इस प्रकार लगाया जाता है कि पानी का प्रवाह ज्यादा प्रभावित न हो और फ्लोटिंग बैरियर सही तरीके से काम करें।