दुकानों पर चाय की चुस्की महंगी, अस्पताल में थाली से रोटी होगी गायब
गैस संकट... सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल में मरीजों को अब मिलेगी खिचड़ी, चाय बेचने वालों में कीमतों में किया इजाफा
पांचवें दिन भी गैस सिलिंडर को लेकर भय जारी, आम जनता में चिंता और परेशानी का माहौल
लोग सिलिंडर का स्टॉक रखने की कोशिश में जुटे, कॉमर्शियल सिलिंडर की सप्लाई पूरी तरह बंद, ढाबा-रेस्टोरेंट चलाने वाले हल्कान
बुकिंग में देरी और उपलब्धता की समस्या बढ़ रही, कई इलाकों में लोग ऑनलाइन बुकिंग नहीं कर पा रहे ग्राहक
चाय की चुस्कियां महंगी, अस्पताल की थाली से रोटी हो सकती है गायब
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम/मानेसर/पटौदी/बादशाहपुर। जिले में गैस सिलिंडर को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। पिछले पांच दिन से शहर में डर और अनिश्चितता का माहौल है। आम जनता से लेकर व्यापारी तक, हर कोई गैस की किल्लत से जूझ रहा है। आलम यह है कि लोग सिलेंडर का स्टॉक करने के लिए लंबी कतारों में लगे हैं, वहीं बुकिंग में हो रही देरी ने इस संकट को और गहरा कर दिया है।
सबसे बुरा असर ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों पर पड़ा है, जहां कॉमर्शियल सिलिंडर की सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई है। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है, चाय की चुस्कियों से लेकर खाने की थाली तक, सब कुछ महंगा हो गया है। यहां तक कि नेहरू स्टेडियम के हॉस्टल में रह रहे छात्रों के सामने भी खाने का संकट खड़ा हो गया है। इस बीच, मुख्यमंत्री उड़न दस्ते ने सोशल मीडिया पर मिली शिकायतों के बाद भोंडसी स्थित एक गैस एजेंसी पर छापेमारी की, जहां लेनदेन में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं।
रोटी-सब्जी की जगह मिलेगी खिचड़ी
गैस संकट का असर अब अस्पतालों की व्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल में मरीजों को दिए जाने वाले भोजन के मैन्यू में बदलाव किया जा सकता है। अस्पताल की कैंटीन को रसोई गैस की कमी से जूझना पड़ रहा है, जिसके कारण भोजन तैयार करने में दिक्कतें आ रही हैं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, मौजूदा हालात को देखते हुए फिलहाल रोटी-सब्जी की जगह मरीजों को खिचड़ी देने की तैयारी की जा रही है। खिचड़ी कम गैस में जल्दी तैयार हो जाती है और मरीजों के लिए हल्का व पौष्टिक भोजन भी माना जाता है।
-
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीजों को किसी तरह की असुविधा नहीं होने दी जाएगी। गैस संकट को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की जा रही है। यदि स्थिति और गंभीर होती है तो मरीजों को रोटी-सब्जी की जगह खिचड़ी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि सभी को समय पर हल्का और पौष्टिक भोजन मिल सके। - डाॅ. लोकवीर, सीएमओ, स्वास्थ्य विभाग, गुरुग्राम
खिलाड़ियों के खाने पर मंडराया खतरा
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच चल रहे युद्ध का असर अब स्थानीय स्तर पर भी दिखने लगा है। बाजार में कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की किल्लत के कारण शहर के नेहरू स्टेडियम स्थित वॉलीबॉल हॉस्टल में रहने वाले खिलाड़ियों को भोजन की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। गैस की आपूर्ति बाधित होने से हॉस्टल में खाना बनाने की व्यवस्था प्रभावित हो गई है, जिससे खिलाड़ियों और प्रबंधन की चिंता बढ़ गई है। हॉस्टल में रहने वाले करीब 25 बालक खिलाड़ी रोजाना यहीं पर भोजन करते हैं। यदि जल्द गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो खिलाड़ियों के भोजन पर सीधा असर पड़ सकता है।हॉस्टल संचालक राकेश तोमर ने बताया कि फिलहाल उनके पास सोमवार तक चलने लायक गैस ही बची है। इसके बाद यदि नया सिलिंडर नहीं मिला तो रसोई चलाना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि बाजार में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर मिलना काफी मुश्किल हो गया है। फिलहाल हमारे पास सोमवार तक का गैस स्टॉक है।
-
हॉस्टल में रहने वाले खिलाड़ियों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। गैस आपूर्ति में आ रही दिक्कत को लेकर संबंधित एजेंसियों से बात की जा रही है। जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक व्यवस्था भी की जाएगी ताकि खिलाड़ियों के भोजन पर कोई असर न पड़े। - आरती कोहली, जिला खेल अधिकारी, गुरुग्राम।
गैस सिलिंडर की कीमतों ने छुआ आसमान
बादशाहपुर में इन दिनों चूल्हे ठंडे पड़े हैं। इलाके की गैस एजेंसियों से सिलिंडर की आपूर्ति ठप होने के कारण हाहाकार मचा हुआ है। इधर गलियों में ऊंचे दामों पर बिकने वाली गैरकानूनी गैस भी अब बाजारों से गायब है। जहां सिलिंडर उपलब्ध हैं, वहां कीमतें आसमान छूकर पांच हजार तक पहुंच गई हैं। तिगरा, रामगढ़, अकलीमपुर और वजीराबाद जैसे गांवों में गैस न मिलने और बुकिंग न होने के कारण मजदूर तबका और मध्यम वर्गीय परिवार अब लकड़ी के चूल्हों और बिजली के इंडक्शन पर निर्भर होते नजर आ रहे हैं। बिजली कटौती की स्थिति में तो लोगों को भूखे पेट सोने तक की नौबत आ गई है।
चाय का कप छोटा, दाम बड़ा
साइबर सिटी में अब चाय की चुस्की लेना महंगा हो गया है। इससे चाय लवर को 10 रुपये चाय की जगह करीब 20 रुपये पड़ेगा। कॉमर्शियल सिलिंडर कई दिन से मिल नहीं पाने से चाय के रेट में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इससे शहर के सुबह और शाम के समय हर गलियों में चाय की दुकान पर जो गुलजार पहले देखने को मिल रहा था, अब वह धीरे-धीरे कम होते नजर आ रहा है। चाय के शौकीन रोहन ने बताया कि चाय पर 5, 10 रुपये बढ़ने से अब लोगों के जेब पर भारी पर सकता है। वहीं, मुकेश ने बताया कि मैं रोजाना कई बार चाय पीता था लेकिन अब रेट बढ़ने के बाद से चाय पीना कम कर दिया है। दुकानदारों का कहना है कि गैस की कीमत और उपलब्धता की समस्या के कारण अब उन्हें चाय की कीमत बढ़ने पर मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि सिलिंडर की मांग की वजह से और छोटे दुकानदारों जो छोटे सिलिंडर भरवाते हैं, उनको 250 से 400 रुपये तक प्रति किलों खरीदने के लिए मजबूर हैं।
सिलेंडर की कीमत और उसकी खपत बढ़ने से दुकान चलाने का खर्च काफी बढ़ गया है। अगर कीमत नहीं बढ़ाई गई तो मुनाफा निकालना मुश्किल हो जाएगा। - मेवा लाल, दुकानदार
दिनभर में कई बार चाय बनानी पड़ती है, जिससे गैस की खपत ज्यादा होती है। ग्राहकों को भी स्थिति समझनी चाहिए, क्योंकि महंगाई का असर छोटे कारोबारियों पर भी पड़ रहा है। - राम, दुकानदार
समोसा हुआ महंगा
गैस सिलिंडर के महंगे होने से शहर के रेस्तरां में स्नेक्स के रेटों में भी बढ़ोतरी हुई है। समोसे और ब्रेड पकौड़े 10 रुपये प्रति प्लेट, रस मलाई, रस्गुल्लों, प्याज कचौड़ी, बेदमी पूरी, छोले भठूरे, दाल कचौड़ी सहित अन्य व्यंजनों में भी 10 से 30 रुपये की बढ़ोतरी देखने को मिली है।
मानेसर में एलपीजी सिलिंडर की कमी, रेहड़ी-पटरी और ढाबा संचालक परेशान
औद्योगिक क्षेत्र मानेसर में भी गैस संकट देखने को मिल रहा है। एलपीजी गैस सिलिंडर की आपूर्ति बाधित होने से रेहड़ी-पटरी और ढाबा चलाने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गैस सिलेंडर समय पर नहीं मिलने के कारण कई छोटे कारोबारियों का काम प्रभावित हो गया है। कुछ लोग अपने व्यवसाय को बंद करने की कगार पर पहुंच गए हैं, जबकि कई लोग मजबूरी में चूल्हे पर खाना बनाने लगे हैं। आईएमटी क्षेत्र में ढाबा चलाने वाले जगबीर ने बताया कि गैस सिलिंडर नहीं मिलने के कारण चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि गैस पहले ही काफी महंगी है और अब सिलिंडर की कमी ने परेशानी और बढ़ा दी है।
घरेलू गैस का नहीं है संकट
पटौदी। पिछले एक सप्ताह से व्यावसायिक (कॉमर्शियल) गैस सिलिंडर की आपूर्ति बंद होने के कारण होटल और ढाबा संचालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गैस नहीं मिलने की वजह से कई होटल और ढाबों में अब लकड़ी और कोयले की भट्टी का इस्तेमाल करके खाना बनाया जा रहा है। इससे काम करना भी मुश्किल हो रहा है और खर्च भी बढ़ गया है। एक ओर गैस की कमी को देखते हुए कई लोग अब बिजली के इंडक्शन चूल्हों की ओर रुख कर रहे हैं लेकिन बढ़ती मांग के कारण पटौदी के बाजारों में इंडक्शन चूल्हे भी लगभग खत्म हो गए हैं। दूसरी ओर घरेलू गैस उपभोक्ता सुबह से ही गैस एजेंसियों पर पहुंचकर रिफिल बाउचर लेने के लिए लाइन में खड़े हो रहे हैं। तेज धूप में लोगों को कई-कई घंटे इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे उन्हें काफी दिक्कत हो रही है।
घरेलू गैस की कोई कमी नहीं है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे एजेंसी पर भीड़ न लगाएं और शांतिपूर्वक अपनी बारी से रिफिल बाउचर कटवाएं। - जोगिंद्र कुमार, संचालक, इंडेन गैस एजेंसी
इंडक्शन चूल्हे हुए महंगे
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर स्थानीय बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। शहर में इंडक्शन चूल्हों की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी हो गई है। जो इंडक्शन चूल्हा कुछ दिन पहले तक करीब 2400 रुपये में मिल रहा था, वह अब बढ़कर लगभग 3500 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, कई दुकानों पर इंडक्शन चूल्हों का स्टॉक पूरी तरह खत्म हो चुका है। सोहना चौक के इलेक्ट्रॉनिक सामान के दुकानदार एमएल गुप्ता ने बताया कि पहले इंडक्शन चूल्हे की कीमत करीब 2400 रुपये थी लेकिन पिछले कुछ दिनों में यह बढ़कर करीब 3500 रुपये तक पहुंच गई है। मांग अचानक बहुत बढ़ गई है, जबकि कंपनियों की ओर से नया माल नहीं आ रहा है। हमारे पास जो स्टॉक था, वह भी लगभग खत्म हो चुका है। वहीं, सदर बाजार के दुकानदार विजय कपूर का कहना है कि गैस की कमी की खबरों के बाद लोगों ने इंडक्शन चूल्हे तेजी से खरीदने शुरू कर दिए। दो-तीन दिन में ही हमारी दुकान का पूरा स्टॉक खत्म हो गया। कंपनियों से संपर्क किया गया है लेकिन फिलहाल वहां से भी सप्लाई नहीं मिल रही है।
कमर्शियल और घरेलू गैस के संकट से लोग परेशान : धर्मेंद्र मिश्रा
गुरुग्राम। कांग्रेस के जिला महासचिव धर्मेंद्र मिश्रा ने उत्पन्न गैस संकट को लेकर भाजपा सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि कॉमर्शियल और घरेलू गैस के संकट से लोग परेशान हैं। होटल, ढाबा और रेहड़ियों पर खाना बेचने वाले दुकानदारों को कॉमर्शियल सिलिंडर नहीं मिल पा रहे हैं। यदि मिल भी रहे हैं तो दो से तीन गुणा दामों पर। 10 रुपये में मिलने वाला समोसा अचानक 15 रुपये में मिल रहा है। चाय भी 10 की बजाय 15 रुपये में मिल रही है। पहले से ही महंगाई की भीषण मार झेल रही जनता पर एक और आर्थिक बोझ बढ़ गया है। ब्यूरो
-
नहीं हो रही बुकिंग, हेल्पलाइन नंबर बंद
दिन भर मेहनत करके शाम को रोटी की उम्मीद करते हैं। अब पांच हजार का सिलिंडर खरीदना हमारे लिए नामुमकिन है। मजबूरी में लकड़ियों से चूल्हा जला रहे हैं, ताकि बच्चों का पेट भर सके। - किशन, मजदूर
गैस एजेंसी पर जाओ तो कहते हैं स्टॉक नहीं है। ऑनलाइन बुकिंग हो नहीं रही और हेल्पलाइन नंबर मिलाओ तो फोन बंद आता है। घर में इंडक्शन है लेकिन बिजली का कोई भरोसा नहीं रहता। - जय नारायण, रामगढ़
पहले परचून की दुकानों पर छोटे सिलेंडर रिफिल होकर मिल जाते थे, जिससे काम चल जाता था, अब वो भी बंद है। कालाबाजारी करने वाले मनमानी कर रहे हैं। आम आदमी पूरी तरह से पिस रहा है - रोहित, रामगढ़
शहर कमाने आए थे, लेकिन यहां तो बुनियादी सुविधा ही छिन गई है। एजेंसी के चक्कर काट-काट कर थक गए हैं। - मिथुन, बादशाहपुर