प्रेम विवाह ने बदला करवा चौथ का रंग, एक हुए अलग-अलग संस्कृति के परिवार
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। बदलते समय ने त्योहारों को ज्यादा खूबसूरत बनाया है। पहले करवाचौथ को लेकर यह उत्साह केवल नई सुहागिनों में रहता था लेकिन अब करवाचौथ का उत्साह पतियों में भी देखा जाता है। कुछ दोस्त से पति बने हैं तो कुछ को परिवार वालों ने मिलाया है। बदलते समय के साथ परिवारों की पृष्ठभूमि भी बदली है। आज के दौर में शादियां केवल एक राज्य या जाति तक सीमित नहीं रही। यही वजह है कि अब करवा चौथ सिर्फ व्रत नहीं बल्कि संस्कृतियों का मिलन का भी पर्व है।
प्रेम विवाह ने करवा चौथ के रंग को बदल लिया है। इसकी सामाजिक स्वीकृति ने विभिन्न राज्यों, जातियों और धर्मों को मिलाकर एक किया है। त्योहार भी फिल्मी न होकर वास्तविक हुए हैं। यही वजह है कि करवाचौथ केवल पंजाब का नहीं बल्कि पूरे देश का पर्व हो गया है। नई पीढ़ी ने पहले करवाचौथ को लेकर कुछ इस तरह अपनी बात रखी।
करवा चौथ को लेकर पति ज्यादा उत्साहित
सेक्टर-45 के ग्रीनवुड सिटी में रहने वाली अनुष्का मोदगिल ने बताया कि मेरे पति चैतन्य मोदगिल इस त्योहार को लेकर बहुत उत्साहित हैं। मैं करवा चौथ मनाने जयपुर मायके जा रही हूं। इस दौरान मेरे पति भी मेरे साथ होंगे। वहीं, सेक्टर-37 डी स्थित इंपीरिया एस्फेरा में रहने वाली सानिया ने बताया कि पहले करवा चौथ को लेकर मैं बहुत उत्साहित हूं। कई दिनों से तैयारी चल रही है। हमारी शादी संस्कृतियों का मिलन है। मैं पंजाबी हूं और मेरे पति रक्तिम बंगाली हैं। हम दोनों दोनों संस्कृतियों को समान रूप से निभाते हैं।
अभिराज सिंह और स्नेह कौर सचदेव का भी शादी के बाद इस साल पहला करवा चौथ है। स्नेह कौर कहती हैं कि मैं मुंबई से हूं और मेरे पति अभिराज दिल्ली से हैं। दोनों शहराें में त्योहार का अपना रंग है। इस त्योहार में हम दोनों अच्छे से सज-धज कर हिस्सा लेंगे। हमारे परिवार के लोग भी इसको लेकर काफी उत्साहित हैं।
श्वेता ने बताया कि शादी के शुरुआती महीनों में मेरी पोस्टिंग गुजरात में थी। अब मैंने नौकरी बदली और दिल्ली आ गई। पहला करवाचौथ पति के साथ ही होगा। हालांकि, हमारे मूल राज्य में यह पर्व नहीं होता है मगर पति के दीर्घायु के लिए रखा जाना वाला यह व्रत मेरे लिए भी खास है।
रिदम शर्मा ने बताया कि मेरे पहले करवा चौथ को लेकर परिवार वाले भी बहुत जोश में हैं। मैंने पूरी तैयारी की है। मेरे पति गौरव चौहान भी त्योहार को लेकर बहुत उत्साहित हैं। त्योहार केवल व्रत नहीं आपसी प्यार और परिवार के साथ अपनत्व का प्रतीक है। इसे सब मिलकर मनाएंगें।