न्यायविदों के तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ
संवाद न्यूज एजेंसी
पटौदी। विजडम का अर्थ सबके प्रति प्यार और करुणा का भाव है। समाज में एक दूसरे के लिए सम्मान की भावना जरूरी है। उक्त विचार दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश मिनी पुष्करना ने व्यक्त किए। ब्रह्माकुमारीज के ओम शांति रिट्रीट सेंटर में तीन दिवसीय सम्मेलन के शुभारंभ पर उन्होंने यह बातें कहीं।
दादी प्रकाशमणी सभागार में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए उन्होंने कहा कि न्याय बिना विवेक के एक मशीन की तरह है और विजडम बिना न्याय के दिशा रहित है। न्याय हमें आश्वस्त करता है। महत्वाकांक्षा के साथ जीने का अवसर देता है। न्याय के लिए केवल कानून ही नहीं बल्कि प्यार और करुणा भी जरूरी है लेकिन समय और सभ्यता के अनुसार न्याय बदलता चला गया। न्याय का अर्थ पर्यावरण के साथ संतुलन बनाए रखना है। लॉ का अर्थ किसी को बांधना नहीं बल्कि सामाजिक समरसता बनाए रखना है। ओआरसी की निदेशिका राजयोगिनी आशा दीदी ने कहा कि हमारी संस्कृति में विजडम का स्थान सर्वोपरि रहा है। भारत आध्यात्मिकता में विश्व गुरु है। विवेक का उपयोग अनिवार्य है।