गुरुग्राम (पवन कुमार सेठी)। अपराधियों को सुधारने के लिए बनी मॉडर्न जेल भोंडसी में कैदियों पर लगाम नहीं लग पा रही है। कैदी जेल में ही आधुनिक मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं मगर इनको रोकने के लिए इस्तेमाल की गई तकनीक पुरानी हो चुकी है। तलाशी की बात करें तो जेल में 11 महीने में 61 बार सर्च किया गया, इसमें 161 एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद हुए। जाहिर है कि कैदी जेल में मनमानी कर रहे हैं।
जेल में मोबाइल का प्रयोग रोकने के लिए 70 मीटर दायरे के दो जैमर लगे हैं। पुरानी तकनीक (2जी) पर आधारित होने के कारण इनका कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है। कैदी 3जी व 4जी के सिम इस्तेमाल कर रहे हैं, तो 2जी जैमर उन्हें रोके भी तो कैसे। समस्या को देखते हुए पांच साल पहले ही जेल में नई तकनीक पर आधारित 3जी जैमर लगाए जाने की योजना बनाई गई थी लेकिन आज तक इस पर कोई कार्य नहीं हो पाया। वहीं अब 4जी का जमाना भी आ चुका है, अब यदि 3जी जैमर लगाए भी जाएंगे तो उसका कोई लाभ नहीं मिलेगा।
भोंडसी जेल में बंद हैं 35 गैंगस्टर व हिस्ट्रीशीटर
पुलिस के मुताबिक, भोंडसी जेल में करीब 2500 कैदी हैं। इनमें 35 गैंगस्टर और हिस्ट्रीशीटर भी शामिल हैं। कैदियों में गैंगस्टर कौशल समेत सूबे गैंग, राजेश बवानिया गैंग समेत झज्जर, रोहतक व सोनीपत के गैंगस्टर और उनके गिरोह के लोग भी बंद हैं। इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि वारदात का निर्देश देने के लिए जेल में फोन का इस्तेमाल किया गया हो।
कैदियों को रिमांड पर लेकर नहीं होती पूछताछ
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक भोंडसी जेल में बंद कैदी से मोबाइल मिलने पर प्रिजनर एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाता है। अदालत के आदेश पर कैदी को मामले की जांच में शामिल कर लिया जाता है, लेकिन कई कारणों से कैदी को रिमांड पर लेकर पूछताछ तक नहीं हो पाती है। ऐसे में पुलिस यह पता नहीं लगा पाती कि कैदी को यह मोबाइल किसने पहुंचाया। ऐसे में पुलिस सिर्फ कॉल डिटेल के आधार पर ही कार्रवाई कर फाइल को अदालत में जमा कर देती है।
जेल प्रशासन पर सवालिया निशान
जेल के प्रवेश द्वार पर कड़ी जांच होने के बाद भी मोबाइल अंदर कैदियों तक कैसे पहुंच रहे हैं। इसको लेकर जेल प्रशासन की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ चुकी है। पिछले दिनों पुलिस ने जेल वार्डन को कैदी तक नशीला पदार्थ पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार भी किया था।
जेल में लगातार तलाशी अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है। जेल में विशेष सेल बनाकर गैंगस्टर व हिस्ट्रीशीटर कैदियों को अलग रखा गया है। इनकी हर गतिविधि को बारीकी से देखा जा रहा है। जैमर लगाने की कार्रवाई आला अधिकारियों द्वारा की जानी है।
- हरेंद्र सिंह, भोंडसी जेल अधीक्षक