किसान परिवार की बेटी एशियन गेम्स में दिखा रही दमखम
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। हसनगढ़, हिसार के एक किसान परिवार की 17 वर्षीय निकिता ने तीसरी कक्षा से शुरू किए कबड्डी के सफर को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा दिया है। द्रोणाचार्य राजकीय महाविद्यालय की छात्रा निकिता ने एशियन गेम्स में पहली बार सीनियर भारतीय कबड्डी टीम की ओर से खेलते हुए भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई। भारत और ईरान के बीच खेले गए मुकाबले में जब भारतीय टीम दबाव में थी, उस समय निकिता को मैदान पर उतारा गया। उन्होंने दो महत्वपूर्ण सुपर रेड किए और उनकी कोई भी रेड खाली नहीं गई। निकिता के शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम ने ईरान को ऑलआउट करने में सफलता हासिल की।
निकिता की मां विनोद कुमारी ने बताया कि निकिता ने तीसरी कक्षा में कबड्डी खेलना शुरू किया था। परिवार में पहले से ही उसकी बहन सीमा कबड्डी खेलती थी। बहन को खेलते देखकर निकिता का भी इस खेल के प्रति लगाव बढ़ा और उसने कबड्डी को अपना लक्ष्य बना लिया। धीरे-धीरे मेहनत और अभ्यास के दम पर उसने जिला और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में पहचान बनाई और आगे बढ़ती गई।
निकिता फिलहाल द्रोणाचार्य राजकीय महाविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं। पढ़ाई के साथ वह लगातार कबड्डी का अभ्यास करती रही हैं। खेल के प्रति उसकी मेहनत का परिणाम रहा कि वह इससे पहले बहरीन में आयोजित यूथ एशियन गेम्स में भारतीय टीम की कप्तानी भी कर चुकी हैं।
खेती करने वाले परिवार से निकली खिलाड़ी
विनोद कुमारी ने बताया कि परिवार का मुख्य काम खेती है। निकिता के पिता अनिल भी खेती करते हैं। परिवार में पांच बहनें और एक भाई हैं। निकिता की बहनों के नाम मनीषा, मोनिका, साक्षी, सीमा और अंतिम तथा भाई का नाम दीपांशु है। उन्होंने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने निकिता के खेल को लेकर उसका पूरा साथ दिया और उसे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
पहले यूथ टीम की कप्तान, अब सीनियर टीम में जगह
यूथ स्तर पर भारतीय टीम की कप्तानी करने के बाद निकिता ने अब सीनियर भारतीय टीम में जगह बनाई है। अपने पहले ही मुकाबले में दबाव के बीच मैदान पर उतरकर जिस तरह उन्होंने प्रदर्शन किया, उससे उनके खेल कॅरिअर को नई पहचान मिली है। एशियन गेम्स में उनके प्रदर्शन से परिवार और द्रोणाचार्य राजकीय महाविद्यालय में खुशी का माहौल है।