प्रथम विश्व युद्ध के सिपाही चेत राम और आजाद हिंद फौज के स्वतंत्रता सेनानी जुग लाल के मिले ऐतिहासिक दस्तावेज
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। इतिहास के पन्नों में खो चुके नायकों को उनका वास्तविक सम्मान दिलाने की दिशा में एक बड़ी सफलता मिली है। शोधकर्ताओं ने पटौदी खंड के पथरेड़ी गांव के दो गुमनाम शहीदों के ऐतिहासिक दस्तावेजों को खोज निकाला है। इन वीर सपूतों में प्रथम विश्व युद्ध के सिपाही चेत राम और आजाद हिंद फौज (आईएनए) के स्वतंत्रता सेनानी जुग लाल शामिल हैं।
इस गौरवमयी खोज को शोधकर्ता भगवान फौगाट और नेतराम लोहचब के पड़पोते ने अंजाम दिया है। उन्होंने राष्ट्रीय अभिलेखागार और अंतरराष्ट्रीय सैन्य दस्तावेजों का गहन अध्ययन कर इन नायकों के योगदान को प्रामाणिक रूप से सामने रखा है। इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य दोनों शहीदों के नाम गांव के गौरव-पट्ट पर अंकित करवाकर उन्हें उचित सम्मान दिलाना है।
सिपाही चेत राम ने दी थी अपने प्राणों की आहुति
दस्तावेजों के अनुसार, सिपाही चेत राम प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश भारतीय सेना में तैनात थे। कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव्स कमीशन (सीडब्ल्यूजीसी) के रिकॉर्ड से खुलासा हुआ है कि उन्होंने 04 अगस्त 1914 को देश और सेना के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। उनका नाम इंडियन बुक ऑफ रिमेंबरेंस में तो दर्ज है, लेकिन विडंबना यह है कि आज तक उनके अपने पैतृक गांव के गौरव-पट्ट पर उनका नाम शामिल नहीं हो सका।
नेताजी की सुभाष ब्रिगेड के वीर सिपाही जुग लाल
वहीं, गांव के दूसरे नायक जुग लाल का जन्म 1907 में पथरेड़ी में हुआ था। वह पहले ब्रिटिश भारतीय सेना का हिस्सा थे, लेकिन देशप्रेम की भावना के चलते 1942 में वे नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज (आईएनए) में शामिल हो गए। उन्होंने आईएनए की प्रसिद्ध सुभाष ब्रिगेड में रहकर अग्रिम मोर्चों पर जंग लड़ी और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ब्रिटिश सरकार की कई अमानवीय यातनाएं भी झेलीं। शोधकर्ताओं की इस कोशिश के बाद अब ग्रामीणों और देशभक्तों में उम्मीद जागी है कि इन दोनों अमर सेनानियों को इतिहास में वह स्थान और आदर मिल सकेगा, जिसके वे हकदार हैं। शोधकर्ताओं ने छूटे हुए नामों के प्रमाण खोजकर उन्हें सम्मान दिलाने का संकल्प लिया है।