चंडीगढ़ के लिए भी..
23 साल पहले काटता था अवैध कालोनी आज बना खरबों का मालिक
- मूल रूप से तावड़ू का बंसल परिवार पहले चलाता था परचून की दुकान
- कांग्रेस सरकार में मिले सीएलयू के बाद रियल इस्टेट के कारोबार में बढ़ाया था कदम
मयंक तिवारी
गुरुग्राम। दिल्ली एनसीआर के जाने माने बिल्डर एमथ्रीएम पर ईडी का शिकंजा कसता जा रहा है। सात दिन के रिमांड पर आय से अधिक संपत्ति की जिसकी लड़ाई चल रही है। वह मूल रूप से तावड़ू के रहने वाले हैं। उनके परिवार वालों की वहां पर मशहूर परचून की दुकान हुआ करती थी। प्रॉपर्टी के कारोबार में 23 साल पहले कदम रख कर बादशाहपुर अड्डे पर 20 दुकान बना कर अपने कारोबार की नींव रखी थी। आज आलम यह है कि सभी बिल्डरों में सबसे बड़ा बैंक लैंड एमथ्रीएम के पास है। इस बात की भी चर्चा है कि बहुत से किसान जिनको मुआवजा मिला है। ब्यूरोक्रेट जिनका काला पैसा सब रियल इस्टेट के कारोबार में लगा रखा है। अपने रसूख का फायदा इस कदर उठाया था कि कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा।
जानकारों की माने तो रूप बंसल के दो भाई जिन्होंने मिल कर प्रापर्टी का काम शुरू किया था। किसी जमाने में बिल्डर कंपनियों के लिए जमीन उपलब्ध कराने का काम करते थे। एक समय ऐसा आया कि एमजीएफ एमआर के लिए जमीन खरीद-फरोख्त को लेकर दोनों में विवाद हुआ। बताते हैं उसके बाद से एमथ्रीएम कंपनी को आगे बढ़ाने का काम किया।
कांग्रेस सरकार में मिले थे ज्यादा सीएलयू
किसी जमाने में शहर के बड़े बिल्डरों के लिए जमीन खरीदने का काम करता था। बाद में अपने नाम से जमीन खरीदने लगा और कांग्रेस सरकार में मिले सीएलयू के बाद रियल इस्टेट के कारोबार में अपना नाम बताया। किसी जमाने में कांग्रेस सरकार के चर्चित आईएएस अधिकारी जिनका सीएलयू के विभाग मेंं सीधा दखल था। उनको भी पार्टनर बना लिया।
जज के साथ सांठ-गांठ में विवादों में आया था बिल्डर
कुछ दिन पहले एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से एक मुकदमा दर्ज हुआ था। इसमें सीबीआई अदालत में तैनात जज सुधीर परमार, के भतीजे की इंट्री इस बिल्डर के साथ मिली थी। इसके साथ एक केन्द्रीय मंत्री के भतीजे का भी नाम सामने आया था। उस मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से अभी चल रही है।