बस्ता छीन रहा बचपन...
प्रशासन की अनदेखी व निजी स्कूलों की मनमानी पड़ रही मासूमों पर भारी, नियम सिर्फ कागजों पर ही हो रहे पूरे
शेरसिंह डागर
नूंह। प्रशासन की अनदेखी व निजी स्कूलों की मनमानी के चलते बच्चों का बचपन भारी बस्ते तले दब रहा है। इससे न केवल बच्चों को शारीरिक व मानसिक थकान हो रही है, बल्कि अभिभावकों पर भी अनावश्यक किताबों के खर्च का बोझ बढ़ रहा है। कुछ निजी स्कूल शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम 2009 व हरियाणा विद्यालय शिक्षा नियम एवं विनियमन 2013, पुस्तकों, वर्दी व अन्य वस्तुओं की खरीद के संबंध में विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ा रहे है। हालांकि, इस बारे में निदेशालय ने निर्देश जारी किए हुए है, लेकिन जिला स्तर पर इन आदेशों की पालना सिर्फ कागजों में ही पूरी की जा रही है।
सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और मौलिक शिक्षा अधिकारियों को नियमों का पालना कराने के आदेश दिए हुए हैं। आरोप है कि अधिकांश निजी स्कूल अभिभावकों को एनसीईआरटी या सीबीएसई द्वारा अनुमोदित पुस्तकों की बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य करते हैं। जबकि, किताबें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप होनी चाहिए।
जिले में कुछ निजी स्कूल अपनी मनमर्जी से उन किताबों को विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए मजबूर करते हैं, जो एनसीईआरटी व सीबीएसई के पाठ्यक्रम से बाहर की हैं। इन किताबों पर भारी भरकम मूल्य होता है, जिसे अभिभावकों को चुकाना पड़ता है। इसके साथ ही किताबें की संख्या भी अधिक हो जाती है और बैग में वजन बढ़ जाता है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चे से ज्यादा उसके बैग में वजन हो जाता है। बच्चा स्कूल जाने व आने में बैग के वजन से टूट जाता है। इससे उसके शरीर व मन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और मां-बाप पर अतिरिक्त खर्च बढ़ता है।
विभाग ने आदेश में स्पष्ट किया है कि स्कूल से संबंधित अतिरिक्त पुस्तकें और अन्य सामान जैसे पानी की बोतल ले जाने से स्कूल बैग का वजन काफी बढ़ जाता है, जबकि अक्सर इस बात की अनदेखी की जाती है।
ये है नियम :
इससे ज्यादा नहीं होना चाहिए बस्ते का बोझ:
कक्षा वजन
1-2 1-5 किग्रा
3-5 2-3 किग्रा
6-7 4-0 किग्रा
8-9 4-5 किग्रा
दसवीं 5-0 किग्रा
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सभी डीईओ और डीईईओ को अपने अधिकार क्षेत्र में नियमों का कड़ाई से अनुपालन के निर्देश हैं। किसी भी स्कूल के छात्रों और अभिभावकों पर अनावश्यक वित्तीय बोझ नहीं डालना है। अगर फिर भी कोई मनमानी करता है तो डीईओ व निदेशालय को लिखित शिकायत करें, इसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - महिपाल ढांडा, शिक्षा मंत्री, हरियाणा
इसको लेकर हम गंभीर हैं। कोई स्कूल अनावश्यक किताबें, यूनिफॉर्म व अन्य चीजें खरीदने के लिए मजबूर करता है और मानदंडों का उल्लंघन करत है तो स्कूल के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होगी। अभिभावक मेल आई.डी. deomewat5120gmail.com व दूरभाष नं. 01267-297690 पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं या फिर स्वयं आकर सीधे शिकायत करें। - अजित सिंह, डीईओ नूंह
भारी भरकम बैग के साथ स्कूल के छात्र।