डॉक्टरों के अनुसार, शुरुआत में सामान्य इलाज से कोई फायदा नहीं हुआ, जिसके बाद बायोप्सी कराई गई। यह फंगस आमतौर पर चमगादड़ों और पक्षियों के मल से दूषित मिट्टी में पाया जाता है और अधिकांश मामलों में फेफड़ों को प्रभावित करता है। आंख की ऑर्बिट में इसका संक्रमण मिलना बेहद दुर्लभ माना जाता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि आमतौर पर यह संक्रमण कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में देखा जाता है, लेकिन इस मामले में महिला की प्रतिरोधक क्षमता सामान्य थी। करीब एक वर्ष तक एंटी-फंगल दवाओं से इलाज के बाद संक्रमण पूरी तरह नियंत्रित हो गया और महिला की दृष्टि सुरक्षित रही। डॉक्टरों ने आंखों में लंबे समय तक लालपन, जलन या सूजन रहने पर बिना देरी विशेषज्ञ से जांच कराने की सलाह दी है।