गर्मी के दिनों में पानी की मांग और और आपूर्ति में है 171 एमएलडी का अंतर
दीपक शर्मा
गुरुग्राम। भीषण गर्मी में शहर में करीब सात लाख लोगों को पूरी तरह पानी की आपूर्ति नहीं हो पाती है। दूसरी ओर बरसात के समय शहर में जबरदस्त जलभराव हो जाता है। नजफगढ़ ड्रेन के आसपास की हजारों एकड़ जमीन जलमग्न हो जाती है। दिल्ली जयपुर हाईवे पर नरसिंहपुर और बसई का जलभराव देश भर में चर्चा का विषय बन जाता है। इस हालत के लिए व्यवस्था के साथ-साथ शहर के हो रहे विस्तार के साथ ही भौगोलिक स्थिति भी जिम्मेदार है। अब सीवर लाइनों की क्षमता बढ़ाने के अलावा स्टॉर्म वाटर ड्रेन आदि के अन्य उपाय किए जा रहे हैं।
शहर में मौजूदा समय में 741 मिलियन लीटर प्रति दिन (एमएलडी) पानी की जरूरत है। जबकि आपूर्ति करीब 570 एमएलडी पानी की हो रही है। मांग और आपूर्ति में हैं 171 एमएलडी का अंतर है। इस तरह बड़े हिस्से में पानी की ठीक से आपूर्ति नहीं हो पाती है। शहर में सबसे सबसे ऊंचाई वाली जगह घाटा है, इसकी समुद्र तल से ऊंचाई 250 मीटर है। इसके बाद शहर के उत्तर में डीएलएफ साइबर सिटी की समुद्र से ऊंचाई 241 मीटर है। शहर के बीच में इफ्को चौक समुद्र तल से 234 मीटर की ऊंचाई पर है। राजीव चौक की ऊंचाई 226 मीटर है। इस तरह शहर के पूर्वी कोनों से ढलान मध्य की ओर बढ़ता है। पश्चिम की तरह खेड़की माजरा में समुद्र से ऊंचाई 209 मीटर रह जाती है। शहर के नाले और सीवर इसी ढलान के हिसाब से बनाए हैं। शहर का सारा बारिश और सीवर का पानी नजफगढ़ ड्रेन की ओर जाता है। यह ड्रेन पूर्व की तरफ बह कर सारा ड्रेन यमुना में डालती है। यह प्राकृतिक बहाव है।
1960 में बना था नजफगढ़ ड्रेन
1960 से पहले नजफगढ़ ड्रेन नहीं था। सारा पानी बहकर दिल्ली के छावला में जाता था। इससे वहां बाढ़ की भी समस्या थी। 60 के दशक में दिल्ली सरकार ने नजफगढ़ ड्रेन का निर्माण किया और इसे यमुना से जोड़ दिया। यहां दिल्ली की ओर एक बांध भी बना दिया जिससे बाढ़ की स्थिति में पानी दिल्ली की ओर न जाए। इसके बाद 25-30 साल तक नजफगढ़ ड्रेन की जमीन पर खूब खेती हुई और कोई समस्या नहीं आई। 1990-2020 के बीच जनसंख्या दो लाख से 30 लाख को पार कर गई । शहर का फैलाव 25 स्क्वॉयर किलोमीटर से 350 स्क्वॉयर किलोमीटर हो गया। इन सालों में नजफगढ़ ड्रेन में कई कई फीट गाद जम गई और उसके पानी लेने की क्षमता कम हो गई।
नरसिंहपुर पर पंपिंग क्षमता बढ़ाई
नरसिंहपुर में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने कुल 90 एचपी क्षमता के 5 पंप लगाए गए हैं। जीएमडीए 260 एचपी पंपिंग क्षमता को और बढ़ा रहा है। इसमें एक 50 एचपी पंप और तीन 70 एचपी पंप जोड़े जा रहे हैं। 50 एचपी का पंप लगाया जा चुका है। सेक्टर-15, पार्ट- 2 की सर्विस रोड पर जलभराव को रोकने के लिए राजमार्ग के विपरीत दिशा में मास्टर स्टॉर्म वाटर ड्रेन में बरसाती पानी को पंप करने के लिए पंपिंग मशीनरी तैनात की गई है।
- मानसून के दौरान शहर को अधिक से अधिक जलभराव से मुक्त रखने के लिए फ्लड कंट्रोल ऑफिस पूरी तरह सक्रिय रहेगा। मास्टर सीवर और ड्रेनेज लाइन पूरी तरह रुकावट मुक्त होगी।- नेहा शर्मा, प्रवक्ता, जीएमडीए
किए जा रहे अन्य उपाय
1- आर्टेमिस अस्पताल के पास नाले की गाद सफाई की गई। सेक्टर- 51-52, सेक्टर-52-57, सेक्टर- 49-50 में यह काम पूरा हो गया है।
2- 1.36 करोड़ रुपये की राशि से सेक्टर-66-67 और सेक्टर-58-59 में 1.35 किलोमीटर आरसीसी पाइप नाली की गाद सफाई की जा रही है।
3- सेक्टर- 72ए से पेस सिटी-II, सेक्टर-37ए तक 13 किलोमीटर स्ट्रॉम वाटर निकासी लेग-III की 14 करोड़ की राशि से गाद निकालने का काम
4- सेक्टर-52ए में 1.30 करोड़ रुपये की लागत से दोनों तरफ पांच किलोमीटर आरसीसी पाइप नाली का काम
5- मास्टर स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज (ओपन ड्रेन लेग III) गडौली गांव के पास से रेलवे कल्वर्ट नंबर-61 तक और धनकोट गांव के पास पोकलेन के साथ कच्चे हिस्से की डिसिल्टिंग
6- 70.57 लाख रुपये की लागत से सेक्टर-27-28, सेक्टर-28-29 और सेक्टर- 25-28 में आरसीसी पाइप ड्रेन की डीसिल्टिंग - काम शुरू
7- 52.83 लाख रुपये से सेक्टर-47-50, सेक्टर- 49-50, सेक्टर- 62-62, सेक्टर- 65-66, सेक्टर- 58-61, सेक्टर- 50-57 और सुभाष चौक के बीच मास्टर रोड के साथ सतही नाली की गाद सफाई का काम प्रगति पर है।
8- गोल्फ कोर्स रोड नालों से गाद निकालने का काम जारी है।