बिना फायर एनओसी संचालित गेस्ट हाउस, पीजी व रेस्टोरेंट पर कार्रवाई नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम इस समय एक बड़े खतरे के मुहाने पर खड़ा है। शहर में मुनाफे की अंधी दौड़ और प्रशासनिक ढिलाई के कारण लाखों लोगों की जान दांव पर लगी है। शहर के करीब 70 फीसदी रेस्टोरेंट, पीजी और गेस्ट हाउस बिना वैध फायर एनओसी के धड़ल्ले से चल रहे हैं। फायर विभाग की भूमिका केवल इमारतों के ऑडिट और कागजी नोटिस भेजने तक सिमट कर रह गई है, जबकि जमीन पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं दिख रही। रिहायशी मकानों को अवैध रूप से व्यावसायिक केंद्रों में बदल दिया गया है, जहां सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर बालकनी और सीढ़ियों तक को बंद कर दिया गया है। यदि समय रहते जिला प्रशासन ने इन 6,000 से अधिक अवैध प्रतिष्ठानों, गेस्ट हाउस व पीजी बिना पर नकेल नहीं कसी तो कोई भी बड़ा अग्निकांड यहां सैकड़ों मासूमों की जान ले सकता है।
विभाग के पास नहीं है सभी इमारतों की जानकारी
फायर विभाग के पास गुरुग्राम में बनी इमारतों के बारे में पर्याप्त आंकड़े नहीं हैं। दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड के बाद गुरुग्राम के फायर विभाग की टीमें अब सर्वे व ऑडिट करेंगी। इनमें गुरुग्राम, मानेसर, पटौदी, सोहना में बनी इमारतों की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। फायर टीमें इन इमारतों, गेस्ट हाउस, पीजी व रेस्टोरेंट-होटलों में सर्वे करेंगी कि उनकी फायर एनओसी है या नहीं। किसी प्रतिष्ठान के पास एनओसी का समय पूरा तो नहीं हो गया है या किसी ने एनओसी ही नहीं बनवाई है।
फायर विभाग की टीमें करेंगी ऑडिट
फायर विभाग की टीमें जिले में संचालित मॉल, वाणिज्यिक परिसरों, कार्यालय भवनों, होटलों, रेस्तरां, शोरूम, पीजी, गेस्ट हाउस सहित अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का ऑडिट किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, ऑडिट के दौरान अग्निशमन उपकरणों, आपातकालीन निकास द्वार, अग्नि अलार्म प्रणालियों, अग्निशामक यंत्रों, निकासी तंत्रों सहित अन्य अनिवार्य सुरक्षा प्रावधानों की उपलब्धता व कार्यक्षमता का आकलन किया जाएगा।
ऑडिट करके बिना एनओसी संचालित प्रतिष्ठानों की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। ऑडिट के दौरान फायर विभाग की टीमें एनओसी संबंधी मानकों के अनुसार रिपोर्ट में रिकॉर्ड दर्ज करेगी, ताकि प्रतिष्ठानों के मालिकों को उसी अनुसार नोटिस भेजे जा सकें। - नरेंद्र यादव, वरिष्ठ अधिकारी, जिला फायर विभाग, गुरुग्राम