मानेसर में एचएसआईआईडीसी की ओर से बिछाई जाएगी 10 किमी पाइपलाइन
संवाद न्यूज एजेंसी
मानेसर। औद्योगिक क्षेत्र मानेसर में अब बाग-बगीचों, पार्कों, सड़क किनारे लगे पेड़ों और कुछ औद्योगिक कामों के लिए शोधित पानी का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) ने 17 करोड़ रुपये की लागत से 10 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाने की योजना बनाई है।
इस योजना के तहत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) से साफ किए गए पानी को पाइपलाइन के जरिये औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंचाया जाएगा। इस पानी का इस्तेमाल पार्कों, हरित क्षेत्रों, सड़क किनारे लगे पेड़ों की सिंचाई और उद्योगों के कुछ कार्यों में किया जाएगा। इससे पीने योग्य पानी की बचत होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
परियोजना के पहले चरण में मानेसर के सेक्टर-1 से 8 को शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों में प्रतिदिन 23.32 मिलियन लीटर शोधित पानी की जरूरत पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। भविष्य में इसकी क्षमता बढ़ाकर 30 मिलियन लीटर प्रतिदिन करने की योजना है।
अधिकारियों के अनुसार, परियोजना के लिए छह कंपनियों ने रूचि दिखाई है। तकनीकी मूल्यांकन पूरा होने के बाद जुलाई में काम का ठेका दिए जाने की संभावना है। शुरुआती दौर में कम कंपनियों के भाग लेने के कारण प्रक्रिया में कुछ देरी हुई थी, लेकिन अब परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है।
योजना के लिए 55 एमएलडी क्षमता वाले सीईटीपी और 25 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी से मिलने वाले शोधित पानी का उपयोग किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना से भूजल पर दबाव कम होगा, ताजे पानी की बचत होगी और मानेसर के औद्योगिक क्षेत्र में हरियाली बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। साथ ही उद्योगों को एक वैकल्पिक और स्थायी जल स्रोत भी उपलब्ध होगा।
औद्योगिक क्षेत्र में लगातार गिर रहा भूजल का स्तर
मानेसर के औद्योगिक क्षेत्र में भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। ऐसे में इस परियोजना के तहत शोधित पानी के उपयोग को बढ़ावा देकर भूजल पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया जाएगा। इससे भूमिगत जल का दोहन घटेगा और भविष्य में भूजल स्तर को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। फिलहाल कई इलाकों में भूमिगत जल काफी फूट नीचे जा चुका है। जिससे घीरे-धीरे इलाके में पानी की खपत बढ़ रही है।
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इस परियोजना के जरिये शोधित पानी का अधिक से अधिक उपयोग बढ़ाना और ताजे पानी की खपत कम करना है। तकनीकी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जल्द ही काम शुरू कर दिया जाएगा। -राजीव गोयल, एजीएम एचएसआईआईडीसी