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Gurugram News: गोवर्धन पूजा और अन्नकूट पर्व आज

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सिद्धेश्वर मंदिर, श्री कृष्ण मंदिर, इस्कॉन समेत अन्य मंदिरों में की जाएगी गोवर्धन पूजा
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। आज मंदिरों में अन्नकूट और गोवर्धन पूजा की जाएगी। हर साल यह पर्व दिवाली के अगले दिन होता है। मगर सोमवार को अमावस्या होने के कारण अन्नकूट और गोवर्धन पर्वत की पूजा मंगलवार को की जाएगी। गुरुग्राम के गुरुद्वारा रोड स्थित श्री सिद्धेश्वर मंदिर में काफी संख्या में लोग इस पूजा के लिए आते हैं।
इस मौके पर मंदिरों में गोवर्धन पूजा के बाद भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग का प्रसाद अर्पित किया जाएगा। सेक्टर चार स्थित श्री कृष्ण मंदिर, कामधेनु धाम गोशाला, बस स्टैंड रोड स्थित राधा कृष्ण मंदिर, सेक्टर-21 स्थित श्री कृष्ण मंदिर, सेक्टर-45 स्थित इस्कॉन मंदिर, बादशाहपुर स्थित इस्कॉन मंदिर गीता भवन, कार्टरपुरी, डूंडाहेड़ा आदि गांवों में गोवर्धन पूजा की जाएगी। धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि इंद्र के प्रकोप से बचने के लिए गोकुल वासियों ने भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना की थी कि इंद्रदेव उनसे नाराज हैं, इसलिए जबरदस्त बारिश हो रही है। इसलिए उन्हें इंद्र के कोप से बचाया जाए। कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी सबसे छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया था और सभी गोकुलवासी अपने पशुओं सहित गोवर्धन पर्व के नीचे शरण लेने के लिए पहुंच गए थे। तभी से गोवर्धन पर्वत की पूरे विधि-विधान के अनुसार पूजा की जाती आ रही है। पालतू पशुओं की सुरक्षा व उनकी सलामती के लिए यह पर्व ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी धूमधाम से मनाया जाता है।
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परंपराओं में शामिल हैं मोटे अनाज की रिवायत
मिलेट्स यानी स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने वाले मोटे अनाज भले ही रोजमर्रा के जीवन में थालियों से गायब हो गए हैं मगर पुरानी परंपराओं और रीति रिवाजों में धर्म और पूजन के बहाने इसका महात्मय आज भी बरकरार है। गोवर्धन पूजा के मौके पर भगवान को बाजरे की खिचड़ी, बाजरे की खीर, कढ़ी, मौसमी सब्जियों से बनी मिली जुली सब्जी, कढ़ी और चावल का प्रसाद चढ़ाने की परंपरा रही है। शहर के मंदिरों में गोवर्धन पूजा पर भोग लगाया जाने वाला यह प्रसाद काफी मात्रा में बनाया जाता है। हर व्यक्ति इस प्रसाद के भंडारे को प्राप्त करना चाहता है। बाजरा हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में अभी भी सर्दियों में रोटी और खिचड़ी बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है। पूजा के प्रसाद के बहाने ही सही लोग बाजरे की स्वादिष्ट खिचड़ी और खीर को प्रयोग में लाते हैं।
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इस संबंध में आयुष विभाग की डाॅ. गीतांजलि अरोड़ा बताती हैं कि सरकार ने बाजरे की मिलेट के तौर पर जागरुकता बढ़ाई है, मगर सर्दी में हरियाणा के खान-पान में यह पहले से शामिल है। बाजरे में आयरन और कई एंटी ऑक्सीडेंट होते हैं। यह ग्लूटेन फ्री होता है। मोटापा दूर करने में सहायक है। यह धीरे-धीरे पचता है। इसलिए इसको खाने के बाद भूख देर से लगती है। मगर इसे खाने में कुछ सावधानियां जरूरी है। इसे भिगोकर या दलिया के रूप में खाना चाहिए। इसके साथ घी जरूर लेना चाहिए, जिससे इसके पचने में सहायता मिलती है।
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