कम ब्याज पर लोन दिलाने और पुराने लोन बंद कराने का देते थे झांसा
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। साइबर अपराध थाना पश्चिम की पुलिस ने लोन कंपनी का डेटा चोरी करके ठगी करने वाले गिरोह के सात आरोपी गिरफ्तार किए हैं। आरोपी कम ब्याज पर लोन दिलाने और पुराने लोन को बंद कराने का लोगों को झांसा देते थे। पुलिस ने आरोपियों से पांच मोबाइल और 70 हजार रुपये नकदी बरामद की है।
आरोपियों की पहचान वैशाली (बिहार) के महसपुर गांव निवासी मोहम्मद मुजफ्फर अली, साउथ 24 परगना (पश्चिम बंगाल) निवासी अमीर हुसैन, नालन्दा (बिहार) के शेखाना खुर्द गांव निवासी मोहम्मद कासिफ, दरभंगा (बिहार) के मिर्जापुर गांव निवासी मोहम्मद इरफान अंसारी, दिल्ली के कापसहेड़ा निवासी अंकित कुमार, दिल्ली के नांगली विहार निवासी सुमित ढिका और शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश) के केशवपुरा निवासी सुमित कुमार के रूप में हुई है। आरोपी मोहम्मद मुजफ्फर अली, मोहम्मद इरफान अंसारी व सुमित कुमार वर्तमान में कापसहेड़ा (दिल्ली) में रह रहे हैं। पुलिस ने सोमवार को आरोपी सुमित ढिका व सुमित कुमार और अन्य पांच आरोपियों को मंगलवार को अदालत में पेश करके जेल भेज दिया है।
रिमांड पर लेकर की थी पूछताछ
पुलिस ने 29 अगस्त को आरोपी मोहम्मद मुजफ्फर को गुरुग्राम से, 30 अगस्त को आरोपी अमीर हुसैन, मोहम्मद कासिफ को नालन्दा (बिहार) से, आरोपी मोहम्मद इरफान अंसारी व अंकित कुमार को गुरुग्राम से और 31 अगस्त को आरोपी सुमित ढिका व सुमित कुमार को गुरुग्राम से गिरफ्तार किया था। आरोपी मोहम्मद मुजफ्फर अली, अमीर हुसैन व मोहम्मद कासिफ को तीन दिन के रिमांड पर और आरोपी इरफान व अंकित को दो दिन के रिमांड पर लेकर पूछताछ की।
कॉल करके खुद को कंपनी का प्रतिनिधि बताते थे
आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि वे सभी कापसहेड़ा (दिल्ली) में रहते हैं और एक-दूसरे को जानते हैं। आरोपी मोहम्मद मुजफ्फर के अन्य साथी लोन देने वाली कंपनी से डेटा लेकर ग्राहकों के मोबाइल पर कॉल करके कंपनी का प्रतिनिधि बताकर लोन समाप्त करने या कम ब्याज पर लोन दिलाने का झांसा देकर ठगी करते थे। आरोपी मोहम्मद ने शिकायतकर्ता की लोन देने वाली कंपनी में काम करने वाले इसके साथी आरोपी इरफान (लोन कंपनी में सेल्स टेलीकॉलर/ पूर्व कर्मचारी), सुमित ढिका (लोन कंपनी सिनियर स्पेशलिस्ट) और सुमित कुमार (लोन कंपनी में जूनियर ऑपरेटर) से कंपनी से लोन लेने वाले लोगों का डेटा प्राप्त करता। उस डेटा को अपने साथी अमीर हुसैन व मोहम्मद कासिफ को दे देता था। आरोपी हुसैन व कासिफ उस डेटा में दिए गए लोन लेने वाले लोगों को कॉल करते और उन्हें विश्वास में लेने के लिए उनके लोन की पूर्ण जानकारी देते थे। लोगों को विश्वास में लेकर क्यूआर कोड या यूपीआई पर रुपये ट्रांसफर करवा लेते और फर्जी दस्तावेज तैयार करके भेज देते। रुपये ट्रांसफर कराने के आरोपी हुसैन व कासिफ अपने साथी मोहम्मद मुजफ्फर को बताते। मोहम्मद मुजफ्फर आरोपी अंकित से ट्रांसफर किए गए रुपये नकद प्राप्त कर लेता।
इतना मिलता था कमीशन
सहायक पुलिस आयुक्त (साइबर अपराध) प्रियांशु दीवान ने बताया कि ठगी करने के लिए आरोपी मोहम्मद मुजफ्फर अली कॉलिंग करने वाले आरोपी अमीर हुसैन को सात फीसदी कमीशन, आरोपी मोहम्मद कासिफ को 15 फीसदी कमीशन, आरोपी अंकित को 20 से 30 फीसदी कमीशन देता था। वहीं, आरोपी सुमित ढिका, आरोपी सुमित कुमार व आरोपी इरफान को एक लोन धारक का डाटा उपलब्ध कराने के बाद बदले पांच हजार रुपये देता था।