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Gurugram News: बीमा लोकपाल बनकर बुजुर्ग को लगाई 1.95 करोड़ की चपत

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अमर उजाला ब्यूरो
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गुरुग्राम। साइबर थाना ईस्ट क्षेत्र में इंश्योरेंस लोकपाल बनकर बुजुर्ग को 1 करोड़ 95 लाख रुपए की चपत लगाने का मामला सामने आया है। सतीश कुमार चावला नामक बुजुर्ग के बीमा कंपनियों से कुछ विवाद चल रहे थे। इस कारण उनके रुपए अटके हुए थे। जालसाजों ने विवाद सुलझा कर फंड जारी करने के नाम पर बुजुर्ग से ठगी की। बुजुर्ग की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी।
पुलिस के अनुसार 72 वर्षीय सतीश कुमार चावला मालिबू टाउन मेंं रहते हैं। उनके इंश्योरेंस कंपनियों में कुछ इश्यू चल रहे थे, जिनकी उन्होंने शिकायत इरडा (आईआरडीए) व इंश्योरेंस लोकपाल से भी की थी। उनके पास सूर्य प्रकाश का कॉल आया जिसने खुद को बीमा लोकपाल बताया। जालसाज ने बुजुर्ग से कहा कि उनकी फाइल को डॉ शुक्ला के पास ट्रांसफर किया जा रहा है जो उनकी दिक्कत को दूर करेंगे। वहीं डॉ शुक्ला ने एक वरिष्ठ अधिकारी हरे कृष्ण मुरारी से उनकी बात कराई। सभी ने सतीश कुमार चावला को भरोसा दिलाया कि उनका फंड सुरक्षित है और जल्द ही उनके बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाएगा।
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अक्तूबर 2022 में उन्हें मनीष अग्रवाल का फोन आया जिसने बताया कि उनके 1 करोड़ 34 लाख रुपए अप्रूवल के लिए भेजे हुए हैं जिसकी वेरिफिकेशन की जानी है। इसके बाद उन्होंने कहा कि एनओसी न होने के कारण उनकी फाइल रिजेक्ट की जा रही है। ऐसे में फोन करने वाले ने 1 लाख 35 हजार रुपए एनओसी चार्ज जमा कराने के लिए कहा। मनीष अग्रवाल और उनके बॉस मोहित कौशिक कथित फंड मैनेजर ने उनसे करीब 25-30 लाख रुपये का भुगतान कराया। जनवरी माह में उनके पास ऑडिट की ओर से वेरिफिकेशन के लिए राधा रमन शर्मा की कॉल आई। चावला से उनकी पूरी बात सुनी और पूरी जानकारी ली गई। उन्होंने भी चावला को रुपये वापस दिलाने में मदद करने का वादा किया। वहीं आईजीएमएस विभाग हैदराबाद के सुभाष चंद्र खुंटिया को शिकायत दर्ज करने की सलाह दी। राधा रमण शर्मा ने भी चावला को उनका पैसा सुरक्षित रहने का आश्वासन दिया और कहा कि वे एनपीसीआई के सत्य प्रकाश चतुर्वेदी के संपर्क में हैं। दस्तावेज पूरे होने के बाद भुगतान जारी कर दिया जाएगा। कुछ डॉक्यूमेंटेशन चार्ज जैसे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, केवाईसी आदि का भुगतान करना होता है। उन्होंने चावला को इरडा (भारतीय बीमा नियामक प्राधिकरण) की पासवर्ड संरक्षित दो रसीदें भी भेजीं और फोन पर पासवर्ड दिया। इसके बाद अलग-अलग बहाने से उनसे रुपए ट्रांसफर कराए जाने शुरू कर दिए गए। कभी फाइल चार्ज तो कभी ऑडिट के नाम पर उनसे करीब 1 करोड़ 95 लाख रुपए आरोपियों ने अलग-अलग समय पर ट्रांसफर करा लिए। सभी ने आपस में मिलीभगत कर धोखाधड़ी करके बीमा शिकायत प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी के रूप में पेश होकर चावला को चपत लगा दी। पुलिस ने केस दर्ज कर छानबीन शुरु कर दी।



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