अरावली के वन्य जीवों को पानी की तलाश में अब भटकना नहीं पड़ेगा। उनकी प्यास बुझाने के लिए वन विभाग एक साल में यहां 20 कृत्रिम तालाब बनाएगा। इसके लिए बाकायदा सर्वे कर तालाब बनाने की जगह चिह्नित की जा रही है। अब यहां कृत्रिम तालाबों की संख्या 40 हो जाएगी।
अरावली पर्वतीय क्षेत्र में काफी संख्या में वन्य जीव रहते हैं। बीते कुछ वर्षों में वन्य जीवों की संख्या में खासी वृद्धि भी हुई है। गर्मी के दिनों में वन्य जीवों के लिए पानी की कमी हो जाती है। ऐसे में वन्य जीव प्यास बुझाने के लिए रिहायशी इलाकों में पहुंच जाते हैं। इसे देखते हुए कुछ समय से अतिरिक्त कृत्रिम तालाब बनाए जाने को लेकर चर्चा चल रही थी, जिसे वन विभाग की वन्य जीव शाखा के उच्च अधिकारियों की बैठक में पिछले सप्ताह स्वीकृति दे दी गई।
स्वीकृति मिलने से पहले ही कुछ इलाकों के नाम तय किए जा चुके हैं। उनमें गुरुग्राम जिले के गांव वजीराबाद, बंधवाड़ी एवं कासन के नाम प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अलावा फरीदाबाद, नूंह एवं महेंद्रगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले अरावली पहाड़ी क्षेत्र में भी तालाब बनाए जाएंगे। जिले के बंधवाड़ी, वजीराबाद, मानेसर, कासन, रायसीना, मंडावर, भोंडसी एवं दमदमा इलाके में अधिकतर वन्य जीव रहते हैं।
अरावली में वन्य जीव संख्या
गीदड़-166, लकड़बग्घा-126, सेहली-91, बिज्जू-61, नेवला-50, तेंदुआ-31, जंगली बिल्ली-26, लोमड़ी-4, भेड़िया-3, लंगूर की प्रजाति-2
अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीव) एमएस मलिक ने बताया कि एक साल के भीतर 20 अतिरिक्त कृत्रिम तालाब अरावली पहाड़ी क्षेत्र में हर हाल में बना दिए जाएंगे। फलदार पौधे लगाने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। इनके अलावा भी कई अन्य कार्य वन्य जीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर किए जाएंगे।