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जहां से निकलता था नमक, वहां पर पेड़ लगा रहा वन विभाग

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सर बशीरपुर का रिजर्व फारेस्ट - फोटो हंसराज - फोटो : Gurgaon
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गुरुग्राम (पवन कुमार सेठी)। नमक निकालने वाली भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए वन विभाग ने सर बशीरपुर से पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की है। इस प्रोजेक्ट में नमकीम भूमि को जिप्सम की मदद से उपजाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है। देश की आजादी तक सर बशीरपुर की भूमि से नमक निकलता था। इसे देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा जाता था। 1947 के बाद अब मंडल वन अधिकारी ने इस भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए विभागीय अनुमति के साथ यह काम शुरू किया है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस जमीन पर करीब 14 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं।
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अधिकारियों के मुताबिक, फर्रुखनगर क्षेत्र की सर बशीरपुर की 140 हेक्टेयर (करीब 347 एकड़) जमीन पर साल 1873 से नमक निकल रहा था। अंग्रेजों के समय में इस नमक को ट्रेन के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा जाता था। समय के साथ-साथ यहां नमक निकलना कम होने लगा। साल 1947 तक नमक निकलना पूरी तरह बंद हो गया। इस स्थान पर कोई पेड़ भी नहीं उग सकता था। यहां जंगली कीकर काफी अधिक संख्या में हैं। लंबे अर्से बाद यहां सफेदा लगाया गया था, ताकि जलभराव को रोका जा सके। साल 1980 तक सफेदा के पेड़ भी सूख गए, जिन्हें काटना पड़ा। समय के साथ इस भूमि का नमकीनपन कम तो हुआ, लेकिन यह अब भी पौधे लगाने के योग्य नहीं है। इसके साथ ही इसे रिजर्व फॉरेस्ट भी घोषित कर दिया गया। इस जमीन को जल्द से जल्द हरा-भरा करने के लिए वन विभाग ने योजना तैयार की।
अधिकारियों के मुताबिक, पौधे लगाने की योजना बनाकर यहां की मिट्टी को जांच के लिए कृषि विज्ञान केंद्र शिकोहपुर भेजा गया। जांच में सामने आया कि कुछ परिवर्तन किया जाए तो इस नमकीन भूमि पर पौधे लगाकर उन्हें सूखने से बचाया जा सकता है। इस योजना पर काम करते हुए पौधे लगाने से पूर्व करीब डेढ़ मीटर गहरा गड्ढा खोदा गया। इसमें सामान्य मिट्टी, रेत, गोबर खाद के साथ-साथ जिप्सम डालने के बाद पौधे लगाए गए। यहां प्रति हेक्टेयर एक हजार पौधे लगाए गए हैं। फॉरेस्ट गार्ड अफजल खान ने बताया कि यहां पिलखन, नीम, अर्जुन, पहाड़ी पापड़ी, जामुन, शीशम और पीपल के पेड़ लगाए गए हैं। इनकी देखरेख के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। रिजर्व फॉरेस्ट की विभाग ने फेंसिंग भी कर दी है।
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