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Gurugram News: सुविधा व संसाधनों के लिए संघर्ष कर रहे दमकलकर्मी

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दमकल केंद्र नूंह में हड़ताल पर बैठे कर्मचाारी नारेबाजी करते हुए
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अंतरराष्ट्रीय फायर फाइटर्स डे पर विशेष
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-न सुरक्षा उपकरण, न स्टाफ, न पर्याप्त गाड़ियां, जान जोखिम में डाल करते हैं काम
दिनेश देशवाल
नूंह। अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की जान-माल की रक्षा करने वाले फायर फाइटर्स के सम्मान में जहां दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय फायर फाइटर्स डे मनाया जा रहा है, वहीं नूंह जिले के अग्निशमन कर्मचारी बुनियादी सुविधाओं और संसाधनों के अभाव में संघर्ष कर रहे हैं। जिले के फायर कर्मी पिछले 27 दिनों से लगातार हड़ताल पर हैं, लेकिन उनकी मांगों पर न तो सरकार का ध्यान गया है और न ही प्रशासन ने कोई ठोस कदम उठाया है।
स्थिति यह है कि आगजनी की बढ़ती घटनाओं से निपटने के लिए प्रशासन को रोडवेज चालकों और होमगार्ड की सेवाएं लेनी पड़ रही हैं, जिससे फायर कर्मियों में भारी नाराजगी है। करीब 20 लाख की आबादी वाले नूंह जिले में नूंह, पुन्हाना, फिरोजपुर झिरका और तावडू में कुल चार फायर स्टेशन संचालित हैं। लेकिन इन स्टेशनों की हालत बेहद चिंताजनक है। स्टाफ की भारी कमी, जर्जर इमारतें, खटारा वाहन और सुरक्षा उपकरणों का अभाव, ये सभी समस्याएं मिलकर अग्निशमन सेवाओं को कमजोर बना रही हैं।
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आबादी के बीच जर्जर इमारतों में फायर स्टेशन:
जिले के सभी फायर स्टेशन नगर परिषद और नगरपालिका कार्यालयों में संचालित हो रहे हैं, जो अब घनी आबादी के बीच आ चुके हैं। ऐसे में आग लगने जैसी आपात स्थिति में दमकल गाड़ियों को बाहर निकलने में ही काफी समय लग जाता है, जिससे राहत कार्य प्रभावित होता है। इसके अलावा जिन इमारतों में ये स्टेशन चल रहे हैं, वे विभागीय मानकों के अनुसार कंडम घोषित हो चुकी हैं। इन जर्जर भवनों में कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं।
स्टाफ व गाड़ियों की कमी:

स्टाफ की स्थिति और भी गंभीर है। जिले में फायर ऑपरेटर के 89 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से केवल 6 नियमित और 43 पे-रोल कर्मचारी ही कार्यरत हैं, जबकि 83 पद खाली पड़े हैं। लीडिंग फायर मैन के 11 पदों में से सिर्फ 3 भरे हुए हैं, वहीं चार सब फायर ऑफिसर के पदों में से केवल एक पर ही नियुक्ति है। इसके अलावा कार्यालय संचालन के लिए जरूरी क्लर्क, कंप्यूटर ऑपरेटर और चपरासी जैसे पद भी रिक्त हैं।

वाहन भी जर्जर हालत में :
वाहनों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। पूरे जिले में आग बुझाने के लिए मात्र 8 गाड़ियां और एक रेस्क्यू टेंडर उपलब्ध है। इनमें से अधिकांश वाहन पुराने और जर्जर हालत में हैं, जिन्हें स्टार्ट होने और मौके पर पहुंचने में ही काफी समय लग जाता है। इससे आपातकालीन प्रतिक्रिया में देरी होना स्वाभाविक है।

सुरक्षा उपकरण नहीं :
सुरक्षा उपकरणों की कमी भी एक बड़ा मुद्दा है। फायर कर्मियों के पास न तो पर्याप्त फायर सूट हैं, न ही गंबूट और हेलमेट जैसी बुनियादी चीजें उपलब्ध हैं। ऑक्सीजन सिलिंडर के साथ बीए सेट की कमी के चलते हाल ही में फिरोजपुर झिरका में सीवर सफाई के दौरान दो मजदूरों की मौत हो चुकी है, जो इस लापरवाही की गंभीरता को दर्शाता है।
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27 दिनों से हड़ताल पर :
अग्निशमन विभाग कर्मचारी यूनियन के प्रधान अरशद, उपप्रधान सुनील देशवाल, सचिव सुखबीर और अन्य सदस्यों ने बताया कि वे पिछले 27 दिनों से अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। उनकी प्रमुख मांगों में वर्ष 2021 से लंबित वेतन वृद्धि, पे-रोल कर्मचारियों को नियमित पदों में समायोजित करना, बेहतर मेडिकल सुविधाएं, पुलिस विभाग की तर्ज पर रिस्क अलाउंस, वर्दी भत्ता और हाल ही में फरीदाबाद में शहीद हुए दो फायर कर्मियों को शहीद का दर्जा देकर उनके परिवारों को एक करोड़ रुपये मुआवजा और सरकारी नौकरी देना शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, उनकी हड़ताल जारी रहेगी।
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