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Gurugram News: आरोपी की दहशत में नेहा के भाई ने बंद कर दिया था स्कूल जाना

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15 दिन पहले पीड़ित परिवार को आरोपी के परिवार ने धमकाया था, कहा था नेहा की शादी कर दो, नहीं तो अंजाम बुरा होगा
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अमर उजाला ब्यूरो

गुरुग्राम। आठ साल पहले यूपी के जिला बदायूं से अपने बच्चों के भविष्य की खातिर गुरुग्राम आया राकेश कुमार का परिवार हत्यारोपी रामकुमार और उसके परिवार की दहशत में दिन गुजार रहा था। राकेश कुमार का परिवार रामकुमार और उसके परिवार की धमकियों से इतना परेशान हो चुका था कि मौत का शिकार हुई नेहा के भाई साहिल ने स्कूल तक जाना बंद कर दिया था। साहिल के माता पिता को उसकी सुरक्षा की चिंता थी। धमकाने के ही क्रम में 15 दिन पहले भी पीड़ित परिवार को धमकाया गया था।
पीड़ित परिवार के मुताबिक नेहा का भाई साहिल मौलाहेड़ा के सरकारी स्कूल में कक्षा-7 में पढ़ता है। नेहा के परिवार के रामकुमार से शादी से इनकार करने के बाद से ही उन्हें धमकियां मिलनी शुरू हो गईं। नेहा की मां मिथलेश ने बताया कि हमने हाथ जोड़कर मना कर दिया था कि हमें बेटी की शादी नहीं करनी है। रामकुमार का परिवार लगातार शादी के लिए दबाव बनाता रहा। लगातार धमकियां मिलने के चलते ही बेटे साहिल का स्कूल भी बंद करा दिया। हमेशा सुरक्षा की चिंता लगी रहती।
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मिथलेश ने बताया कि केवल रामकुमार ही नहीं उसका पूरा परिवार हमारे ऊपर दबाव बनाने में लगा था। 15 दिन पहले भी रामकुमार के ममेरे भाई सचिन ने पुलिस में होने का रौब दिखाते हुए हमारे परिवार को बुरी तरह घमकाया।

दो बार सोशल मीडिया पर डाल दी थी फोटो, करता था ब्लैकमेल
गुरुग्राम। नेहा के मामा दिनेश कुमार ने पोस्टमार्टम गृह पर बताया कि रामकुमार लगातार नेहा को ब्लैक मेल कर रहा था। उसकी फोटो भी सोशल मीडिया पर डाल दी थी और इस वजह से अन्य जगहों से आने वाले रिश्ते भी किनारा करने लगे थे। सोशल मीडिया पर दो बार तस्वीरें डाल देने से परिवार वाले भी बहुत परेशान हो गए। लोकलाज के डर से नेहा के परिवार वालों ने इस बात की ज्यादा चर्चा नहीं की। परिवार वालों का मानना था कि जल्द ही सब कुछ सही हो जाएगा। उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि बात यहां तक पहुंच जाएगी।
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रो-रोकर मां का बुरा हाल, हो जाती बार-बार बेहोश

गुरुग्राम। गांव मौलाहेड़ा में राकेश कुमार आठ फीट की गली में 30 गज में बने मकान की चौथी मंजिल पर रहता है। छोटे से घर में पूरा परिवार रहता है। घटना के बाद मिथलेश को सांत्वना देने उसके पड़ोस की महिलाएं आईं तो उनकी भी रुलाई छूट गई। मिथलेश का भी रो रोकर बुरा हाल हो रहा था। घर का सामान बिखरा हुआ था। पूरे परिवार में बदहवासी थी। बेटी के साथ हुई वारदात को याद करके मिथलेश बार-बार रोते रोते बेहोश हो रही थी।
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