पटौदी। मानसून में देरी की वजह से ग्रामीण इलाकों में किसानों की चिंताएं अब बढ़ने लगी हैं। दरअसल धान के बीजों के छिड़काव का अब समय हो चुका है, लेकिन बारिश न होने से खेत सूखे पड़े हैं। किसानों का कहना है कि पिछले वर्ष 25 जून से पहले ही बारिश शुरू हो गई थी। इस वजह से जुताई के बाद खेतों में पानी लगाकर धान के बीजों का छिड़काव कर दिया गया था, लेकिन इस बार स्थिति बिल्कुल अलग है। अभी एक दिन भी ऐसी बारिश नहीं हुई है कि उसके बाद खेतों की जुताई हो सके। पटौदी, सोहना व फर्रुखनगर के कई किसान बारिश से पहले ही धान का छिड़काव करना चाहते हैं, लेकिन उनके पास अपना कोई सिंचाई का साधन नहीं हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में माह के अंत तक भी मानसून आने के कोई आसार नहीं हैं। ऐसे में किसानों की समस्या बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि बारिश होने में देरी से धान के अलावा ज्वार, बाजरा समेत खरीफ की अन्य फसलें भी प्रभावित होंगी।
इन इलाकों में होती है धान की पैदावार
पटौदी क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से लोकरा, मुमताजपुर, सफेदारनगर, पटौदी, नानूकला, खोड़, हेडाहेडी, सैयद शाहपुर, खानपुर, बासपदमका, ऊंचा माजरा, नरहेड़ा सहित कई गांवों के किसान धान की पैदावार करते हैं। इस बार बारिश न होने व महामारी के चलते मजदूर पहले ही अपने गांव चले जाने से किसानों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। पटौदी क्षेत्र कृषि क्षेत्र है और यहां के लोग कृषि पर ही निर्भर हैं।
बारिश न होने से धान के बीजों के छिड़काव में समस्या आ रही है। वहीं, कोरोना महामारी के कारण दूसरे राज्यों के मजदूर के न आने से धान के अलावा अन्य फसलों के बोने में भी दिक्कतें आ रही हैं।
- चौधरी विजय पहलवान, किसान, निवासी गांव मऊ
धान के बीजों का छिड़काव के लिए पानी की दरकार है, लेकिन बारिश न होने से समस्या हो रही है। धान रोपने के लिए यही समय है, लेकिन मजदूर न होने के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
- एजाज हुसैन जैदी, किसान, निवासी पटौदी