गुरुग्राम। सेक्टर-47 स्थित मेसर्स एबीडब्ल्यू इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी पर एक दंपती ने 71.75 लाख रुपये की ठगी करने का आरोप लगाया है। दंपती ने प्लेटिनम टावर्स सोसाइटी में दो दुकानें दिसंबर 2009 में बुक की थीं, लेकिन एग्रीमेंट के अनुसार न तो उन्हें हर महीने रिटर्न दिया गया और ये दुकानें भी 2013 में बिल्डर ने किसी अन्य के नाम पर बुक कर दीं। इस पूरे फर्जीवाड़े का 2019 में खुलासा हुआ। सदर थाना पुलिस केस दर्ज कर जांच कर रही है।
पुलिस के मुताबिक, जे एम सहाय नोएडा के सेक्टर-39 में रहते हैं। उन्होंने पुलिस को दी शिकायत में बताया है कि 16 दिसंबर 2009 को उन्होंने अपने व अपनी पत्नी अनीता सहाय के नाम पर एबीडब्ल्यू इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी के सेक्टर-47 स्थित प्लेटिनम टावर प्रोजेक्ट में यूनिट नंबर 33 व 34 बुक कराई थीं। दोनों दुकानों के लिए 71.75 लाख रुपये दिए गए थे। एग्रीमेंट में तय हुआ था कि दोनों दुकानों के लिए हर महीने बिल्डर की ओर से अश्योर्ड रिटर्न दिया जाना है, जो 19 दिसंबर 2009 से लागू होगा और हर महीने की 7 तारीख को मिलेगा। बाकी रकम साढ़े 4 लाख भरने के बाद यह रिटर्न की दर भी बढ़ाई जानी थी। 10 दिसंबर 2012 को यह बकाया पेमेंट भी दंपती ने दे दी, लेकिन 21 दिसंबर 2013 को बिल्डर ने इन्हीं दो यूनिट को आशीष कुमार गुप्ता के नाम पर अलॉट कर दिया।
उन्हें ये 91 लाख 95 हजार 6 रुपये में दे दी गई। आशीष के साथ भी अश्योर्ड रिटर्न का एग्रीमेंट किया गया, लेकिन बिल्डर ने न तो समय पर निर्माण पूरा किया और न ही हर महीने के अश्योर्ड रिटर्न के वादे को निभाया। सितंबर 2014 के बाद ये पेमेंट नहीं मिली। फिर इसी तरह की शिकायतें अन्य ग्राहकों के साथ भी सामने आई तो कोर्ट में केस चला और प्रोजेक्ट के लिए लिक्विडेशन अधिकारी नियुक्त हुआ, जिसके बाद आशीष कुमार गुप्ता ने भी इन दो यूनिट पर क्लेम किया।
तब पता चला कि बिल्डर ने इन दोनों दुकानों की कंवेंस डीड आशीष के नाम कराकर उसे पजेशन दे दिया है। साइट पर वे पहुंचे तो वहां मेंटेनेंस देखने वालों ने उन्हें बताया कि यूनिट नंबर 33, 34 तो जे एम सहाय व उनकी पत्नी के नाम पर हैं, जिसके बाद वे चले गए। दंपती को पता चला तो उन्होंने प्रोजेक्ट के ऑफिशियल लिक्विडेटर को 24 सितंबर 2019 को लिखित शिकायत दी। पीड़ित का आरोप है कि बिल्डर ने साल 2013 में उनकी दुकान का एग्रीमेंट कर लिया था जबकि उन्हें इसका सितंबर 2019 में पता चला। तब मामले की शिकायत पुलिस को दी गई, जिसके बाद गुरुग्राम सदर थाना पुलिस ने केस दर्ज किया है।