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फर्जी आईपीएस अधिकारी बनकर ठगने वाला गिरफ्तार

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गुरुग्राम। फर्जी आईपीएस अधिकारी बनकर गुरुग्राम समेत यूपी में प्रॉपर्टी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले युवक को गुरुग्राम पुलिस ने प्रोडक्शन रिमांड पर लिया। खेड़कीदौला थाना पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने पांच वारदात कबूली हैं। इसमें आरोपी ने तीन नोएडा जबकि एक हापुड़ और एक गुरुग्राम में की थी। आरोपी को पूछताछ के बाद पुलिस ने शुक्रवार को कोर्ट में पेश कर भोंडसी जेल भेज दिया।
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पुलिस अधिकारियों ने बताया कि 8 सितंबर 2018 को खेड़कीदौला थाना पुलिस में सेक्टर-82 निवासी लोकेश शर्मा ने दी शिकायत के मुताबिक यूपी के ग्रेटर नोएडा निवासी गौरव मिश्रा पर खुद को आईपीएस अधिकारी (डीसीपी) बताकर ठगी करने का आरोप लगाया गया। शिकायतकर्ता के मुताबिक गौरव उसके साथ 2009 में एक कंपनी में नौकरी करता था। साल 2014 में दीपावली के समय पीड़ित को एक नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को इंस्पेक्टर आरके सिंह बताते हुए कहा कि आईपीएस गौरव मिश्रा आपसे बात करेंगे। गौरव ने बात कर बताया कि कंपनी छोड़ने के बाद सिविल सर्विस की तैयारी की और 2012 में आईपीएस चयनित हो गए।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि वह दो बार इंस्पेक्टर आरके सिंह के साथ लालबत्ती की कार में पीड़ित के पास भी आया। एमजी रोड पर बार में भी मिले और वहां डिस्काउंट के नाम पर वेटर को हड़काया भी कि 2-4 हजार के लिए डीएसपी को कॉल थोड़े न करूंगा। इसी दौरान ग्रेटर नोएडा में एक 100 गज के प्लॉट को बेचने की बात कही। 15 लाख में सौदा तय हुआ और भुगतान कर दिया गया। काफी समय तक रजिस्ट्री न होने पर आरोपी ने आईपीएस का रौब दिखाकर रजिस्ट्री न कराने की बात कहते हुए भगा दिया। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। पुलिस जांच में सामने आया कि फर्जी आईपीएस यूपी में भी इसी तरह की कई धोखाधड़ी की वारदातों को अंजाम दे चुका है जिसमें वह जेल में बंद है। खेड़कीदौला थाना पुलिस ने बुधवार को आरोपी को प्रोडक्शन रिमांड पर लिया गया। आरोपी से पूछताछ के बाद शुक्रवार को उसे भोंडसी जेल भेज दिया गया।
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लालच ने बना दिया इंजीनियर को ठग
आरोपी गौरव मिश्रा ने बीटेक करने के बाद निजी कंपनी में नौकरी करता था। कम समय में ज्यादा पैसे कमाने के लालच में वह अपने साथियों के साथ फर्जी आईपीएस बनकर ठगी करने लगा। आरोपी ने इंटरनेट की मदद से आईपीएस के हावभाव की ट्रेनिंग ली इसके बाद आईपीएस की वर्दी की व्यवस्था कर पांच वारदातों को अंजाम दिया।
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