भारतीय वस्त्र परिधान उद्योग को फ्री ट्रेड डील से उम्मीदें, गुरुग्राम की करीब 3000 इकाइयों को होगा फायदा
पूनम
गुरुग्राम। पश्चिम एशिया युद्ध संकट के खत्म होने और होर्मुज मार्ग के खुलने की सूचना ने वस्त्र परिधान उद्योग निर्यातकों को राहत भरी सूचना दी है। इसके साथ ही यूरोपियन यूनियन, यूके, न्यूजीलैंड अन्य देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफडीए) से उम्मीदें बढ़ी हैं।
वस्त्र परिधान निर्यातकों के सहयोग के लिए बने कपड़ा मंत्रालय के सहयोगी संगठन अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ने वर्ष 2030 देश के वस्त्र परिधान निर्यात को 100 बिलियन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के सेक्रेटरी जनरल मिथिलेश्वर ठाकुर बताते हैं कि यूरोपियन यूनियन और यूके के साथ हुए एफटीए पर हस्ताक्षर हो चुका है। यह 15 जुलाई तक लागू हो जाएगी। अभी तक इन देशों में भारत के निर्यात पर 9.5 प्रतिशत ड्यूटी लग रही थी। जबकि वस्त्र परिधान उद्योग के प्रतिद्वंद्वी देशों बांग्लादेश, वियतनाम, कंबोडिया आदि ड्यूटी फ्री थे। इस एफडीए का फायदा गुरुग्राम, दिल्ली एनसीआर समेत देश के वस्त्र परिधान निर्यातकों को होगा। अमेरिका और यूरोप यहां के वस्त्र परिधान के बड़े आयातक हैं। अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाए जाने के बाद से नए बाजार को तलाशा जा रहा था। यूरोपियन यूनियन के देशों, यूके के अलावा आस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, कोरिया, जापान और ओमान आदि अरब देश में वस्त्र परिधान उद्योगों के लिए संभावनाएं बढ़ेगी। हालांकि इन देशों में पहले से भी भारतीय व्यापार होता है मगर पिछले दिनों इन देशों से व्यापारिक संबंध बेहतर बनाए जाने की कोशिश हुई है।
60 प्रतिशत से ज्यादा निर्यात 10 देशाें में
जिला उद्याेग केंद्र में एमएसएमई निदेशालय के डिप्टी डायरेक्टर गौरव लाठर बताते हैं कि विश्व के 190 देशों में यहां से निर्यात होता है, जिसमें 60 प्रतिशत से ज्यादा शीर्ष 10 देशों में ही निर्यात होता है। गुरुग्राम का निर्यात 1.8 बिलियन डॉलर प्रतिवर्ष है। एमएसएमई विभाग वस्त्र परिधान उद्यमियों को मार्केट डेवलपमेंट असिसटेंस स्कीम और निर्यातक इकाइयों को फ्रेट असिस्टेंस स्कीम माल ढुलाई सहायता योजना के तहत अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई में सब्सिडी देता है।
वर्जन
यूरोप, इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया जैसे देशों में हमारा निर्यात बढ़ेगा। गुरुग्राम, मानेसर, नोएडा आदि को इसका फायदा मिलेगा। इन देशों में 99 प्रतिशत इंपोर्ट ड़्यूटी खत्म हुई है। -दीपक मैनी, चेयरमैन प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री
दिल्ली एनसीआर क्षेत्र, जो देश के प्रमुख परिधान निर्यात केंद्रों में गिने जाते हैं। अब अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक गतिविधियां पुनः गति पकड़ेंगी और रुके हुए ऑर्डर धीरे-धीरे वापस आने लगेंगे। -कपिल साध, परिधान निर्यातक
मैं सिल्क टेक्सटाइल निर्यातक हूं। हमारा निर्यात अमेरिका और यूराेप को है। यहां सबसे बड़ी बाधा इंफ्रास्ट्रक्चर की है। बिजली नहीं रहती, सड़के खराब है। -संजीव कपूर, सिल्क टेक्सटाइल निर्यातक
हरियाणा में हमारी दिक्कतें मजदूरी दर बढ़ने से ज्यादा बढ़ गई हैं। मंदी के समय में 35 प्रतिशत मजदूरी दर हमारे लिए 50 प्रतिशत का बोझ है और यह नहीं कम होगा। श्रम बहुल उद्योगों को इससे जूझना पड़ रहा है। -संजय कालरा, परिधान निर्यातक