गुरुग्राम। मानसून के दौरान शहर में जलभराव हुआ तो कार्यकारी अभियंता जिम्मेदार होंगे। इस बारे में स्थिति स्पष्ट करते हुए निगमायुक्त ने अधिकारियों को समय रहते अपने-अपने क्षेत्रों का दौरा कर जलभराव वाली जगहों को चिह्नित करने व खामियों को दुरुस्त करने का निर्देश दिया है। इस दौरान कार्यकारी अभियंताओं को रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का भी निरीक्षण करना होगा और जरूरत के मुताबिक उनकी मरम्मत भी करानी होगी।
मानसून के दौरान जलभराव की समस्या को कम करने के लिए नगर निगम की तरफ से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। निगमायुक्त मुकेश आहुजा लगातार अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को भी निगमायुक्त ने निगम के कार्यकारी अभियंताओं व अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की।
उन्होंने कहा कि जलभराव वाली संभावित जगहों पर पर्याप्त संख्या में मशीनरी, पंप व कर्मचारियों की व्यवस्था करें। सभी कार्यकारी अभियंता अपने-अपने क्षेत्र का दौरा करके जलभराव के सभी संभावित स्थानों का निरीक्षण करें। खास तौर पर अंडर पास में लगी पंप व मशीनरी की जांच करें तथा उन्हें चालू हालत में रखना सुनिश्चित करें। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि नगर निगम क्षेत्र में कर्मचारियों व मशीनरी की व्यवस्था संबंधित कार्यकारी अभियंता को ही करनी है।
रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की भी जांच करनी होगी
निर्माण कार्य के कारण अगर कहीं जलनिकासी में समस्या है तो उसको भी अभियंताओं को दुरुस्त कराना होगा। निगमायुक्त ने मानसून से पहले सीवरेज व ड्रेनेज की सफाई कराने व मैनहोल को साफ कराने का निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सीवरेज व ड्रेनेज लाइन बरसाती पानी को झेलने के लिए तैयार रहनी चाहिए। साथ ही सभी कार्यकारी अभियंता उनके क्षेत्र में बने रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की भी जांच करेंगे।
कार्यों का डाटा भी तैयार करना होगा
कार्यकारी अभियंताओं को अपने-अपने क्षेत्र में किए जाने वाले कार्यों का डाटा भी तैयार करना होगा। बैठक में नगर निगम की अतिरिक्त आयुक्त जसप्रीत कौर ने ड्रेनेज प्लान कमेटी द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के बारे में निगमायुक्त को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष हुए जलभराव के बाद नगर निगम गुरुग्राम में ड्रेनेज प्लान कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी ने गुरुग्राम के नागरिकों, आरडब्ल्यूए, निगम पार्षदों तथा एक्सपर्ट से सुझाव लिए थे।