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ईडब्ल्यूएस फ्लैट बिक्री फर्जीवाड़ा - 6 के खिलाफ एफआईआर, एसडीएम की बढ़ी मुश्किलें

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गुरुग्राम। डेढ़ वर्ष पहले सेक्टर-49 स्थित शीशपाल विहार सोसाइटी में ईडब्ल्यूएस वर्ग के फ्लैटों की बिक्री में हुए फर्जीवाड़े में तत्कालीन एसडीएम, नायब तहसीलदार समेत अन्य लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अदालत ने एसडीएम, पूर्व नायब तहसीलदार, रजिस्ट्री क्लर्क, शिवाजी नगर थाना प्रभारी समेत अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि ऑर्डर कॉपी मिलने के 24 घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज की जाए। शिवाजी नगर थाना प्रभारी पर उसी के थाने में एफआईआर दर्ज होगी।
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अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अश्विनी कुमार ने आरटीआई कार्यकर्ता की याचिका पर संज्ञान लेते हुए यह आदेश दिया। उन्होंने कहा कि सभी तथ्यों से स्पष्ट है कि आरोपियों ने नियमों का जमकर उल्लंघन किया। ऐसे में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाना जरूरी है। उन्होंने अपने फैसले में तत्कालीन नायब तहसीलदार दलबीर सिंह दुग्गल, रजिस्ट्री क्लर्क विकास वर्मा, एसडीएम जितेंद्र, शिवाजी नगर थाना प्रभारी निरीक्षक मनोज, फ्लैट बेचने वाली महिला विजय महेंद्र सिंह और खरीददार महिला कमला देवी समेत अन्य अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए। आरटीआई कार्यकर्ता रमेश यादव ने बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद मंगलवार शाम को ही कॉपी शिवाजी नगर थाना पुलिस को भेज दी गई।
आरटीआई कार्यकर्ता रमेश यादव की ओर से अदालत में दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि सेक्टर-49 स्थित शीशपाल विहार सोसायटी में ईडब्ल्यूएस वर्ग के फ्लैट को महिला विजय महेंद्र सिंह ने सिकंदरपुर बढ़ा गांव निवासी महिला कमला देवी को बेचा था। 16 अगस्त 2018 को इसकी रजिस्ट्री बादशाहपुर तहसील में हुई। आरोप है कि फ्लैट लेने के महज 40 दिन बाद इसे दोबारा बेच दिया गया, जबकि नियमों के तहत 5 साल तक ईडब्ल्यूएस फ्लैट किसी को बेचा नहीं जा सकता। रजिस्ट्री करते समय संबंधित अधिकारियों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए था, जिसमें लापरवाही करते हुए नियमों का उल्लंघन किया गया।
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कार्यकर्ता की शिकायत पर एडीसी जांच में फर्जीवाड़ा सही पाया गया। जिस पर जिला उपायुक्त ने 20 जून 2019 को एसडीएम को पत्र लिखकर मामले में एफआईआर दर्ज कराने को कहा। इसके बाद 15 जुलाई, 27 अगस्त और 14 नवंबर को भी जिला उपायुक्त दफ्तर की ओर से एसडीएम को पत्र लिखकर तुरंत एफआईआर कराने को कहा गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस संबंध में आरटीआई कार्यकर्ता की ओर से 23 जनवरी को फिर से जिला उपायुक्त को पत्र लिखकर शिकायत की गई कि जानबूझकर मामले में आरोपियों को बचाने के लिए कार्रवाई नहीं कराई जा रही है।
आरटीआई कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि शिवाजी नगर थाना प्रभारी को भी 27 जनवरी को शिकायत देकर जिला उपायुक्त ऑफिस के पत्र व जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई, लेकिन उन्होंने भी शिकायत पर कोई संज्ञान नहीं लिया। इस पर उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
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