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Gurugram News: आधुनिक दौर में भी मेवात में तेजी से बढ़ रही बाल विवाह जैसी बुराई

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आधुनिक दौर में भी मेवात में तेजी से बढ़ रही बाल विवाह जैसी बुराई
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एक वर्ष में बाल विवाह निषेध विभाग को मिली 32 शिकायतें



दिनेश देशवाल



नूंह। देश के पिछड़े जिलों में शुमार मेवात आधुनिक दौर में भी बाल विवाह जैसी बुराईयों से जकड़ा हुआ है। जिले में हर माह लगभग तीन बाल विवाहों की शिकायत संबंधित विभाग के पास आ जाती है। जबकि इससे कई गुणा संख्या में ऐसे मामलों की शिकायत नहीं होती और नाबालिग लड़के व लड़कियां बाल विवाह के बंधन में जकड़ जाते हैं। इसके कारण उन्हें भविष्य में अपने वैवाहिक जीवन में अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

शैक्षणिक रूप से पिछड़ा होने के कारण जिले में अनेक प्रकार की सामाजिक बुराइयां अपना वर्चस्व जमाए हुए हैं। इसमें से बाल विवाह भी एक ऐसी ही बुराई है। अप्रैल 2024 से लेकर अप्रैल 2025 तक एक वर्ष में बाल विवाह निषेध अधिकारी के कार्यालय में बाल विवाह की 32 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिन्हें रोकने के लिए टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो अधिकतर शिकायतें सही पाई गईं। जिस पर तुरंत विवाह को रोका गया और परिजनों को बाल विवाह न करने के लिए प्रतिबंधित किया गया।
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निरक्षरता एक बड़ी वजह : बाल विवाह के परिपेक्ष्य में निरक्षर होना एक बड़ी वजह बनकर सामने आती है। जिले की कुल साक्षरता दर लगभग 54 प्रतिशत है। इसमें पुरुष साक्षरता दर लगभग 69 प्रतिशत है तो महिला साक्षरता दर मात्र 36 प्रतिशत है। इसके अलावा यहां की बहुसंख्यक आबादी आज भी बच्चियों की शिक्षा को लेकर उदासीन है, जिसके परिणामस्वरूप मेव महिला साक्षरता दर करीब दस प्रतिशत है। जिले में महिलाओं की साक्षरता दर कम होने के कारण बेटियों को बाल विवाह की तरफ झोंक दिया जाता है।



जागरूकता की कमी : जिले में बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता की कमी के कारण भी लोग इस बुराई का साथ दे रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा जहां ऐसे विषयों पर जागरूकता अभियानों की कमी रहती है, वहीं, लोगों का अनपढ़ होना, रुढिवादिता, गरीबी, जागरूकता की कमी के कारण इस बुराई पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के साथ जिले में एमडीडी ऑफ इंडिया शक्ति वाहिनी के अलावा अन्य कोई संस्था नहीं है जो इस विषय पर जागरूकता अभियान चलाती हो।
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इस विषय पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं। जिसका असर है कि लोग जागरूक हो रहे है। वर्ष 2022 और 2023 के मुकाबले 2024 में बाल विवाहों की संख्या में कमी आई है। -मधु जैन, बाल विवाह निषेध अधिकारी
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