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Gurugram News: इमर्जेंसी क्रेडिट लाइन स्कीम का उद्यमियों ने किया स्वागत

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- अतिरिक्त ऋण सुविधाओं से बंद होने से बच जाएंगे उद्योग

- इमर्जेंसी क्रेडिट लाइन स्कीम को लेकर उद्यमियों ने किया स्वागत मगर इसे ब्याज मुक्त रखने की मांग रखी
संवाद न्यूज एजेंसी

गुरुग्राम। पश्चिम एशिया युद्ध के कारण हुई लागत वृद्धि और अन्य संकटों से जूझ रहे एमएसएमई, हवाई सेवा और अन्य क्षेत्र के लिए पिछले दिनों प्रधानमंत्री ने इमर्जेंसी क्रेडिट लाइन स्कीम जारी की है। केंद्र सरकार ने 2,55,000 करोड़ के अतिरिक्त ऋण की सहायता देने की बात की है। इसके तहत एमएसएमई उद्यमी सरकार की गारंटी पर वर्तमान वर्किंग कैपिटल पर 20 प्रतिशत अतिरिक्त ऋण ले सकते हैं। उन्हें इसे एक साल बाद से चुकाना होगा। गुरुग्राम के एमएसएमई उद्योगों के प्रतिनिधियों ने इसका स्वागत करते हुए अन्य सहायता की भी उम्मीद की है।


युद्ध संकट के बीच यह राहत नहीं औपचारिकता



गुरुग्राम के उद्यमियों का एक वर्ग कहता है कि सरकार द्वारा घोषित नई इमरजेंसी क्रेडिट स्कीम को एमएसएमई सेक्टर के लिए बड़ी राहत के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी वास्तविक उपयोगिता विशेषकर एमएसएमई इकाइयों के लिए लगभग नगण्य दिखाई देती है। अभी एमएसएमई को अतिरिक्त ऋण नहीं बल्कि वास्तविक आर्थिक राहत की आवश्यकता है। यह योजना छोटे उद्योगों की मूल समस्याओं को समझने के बजाय केवल अतिरिक्त कर्ज उपलब्ध कराने तक सीमित दिखाई देती है। एमएसएमई पहले से ही सीमित कार्यशील पूंजी और पुराने बैंक ऋणों के दबाव में हैं। बैंक नई क्रेडिट सुविधा देने से पहले सीआईबीआईएल स्कोर, गारंटी, वित्तीय अनुपात और पूर्व ऋण स्थिति जैसी कठोर शर्तें लागू कर देते हैं। परिणामस्वरूप वही छोटे उद्योग, जिन्हें तत्काल सहायता चाहिए, प्रक्रिया और पात्रता की जटिलताओं में फंसकर बाहर रह जाते हैं।
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वर्जन

ब्याज दर में कटौती होनी चाहिए। छोटे उद्योगों के लिए नया लोन राहत नहीं बल्कि भविष्य का अतिरिक्त वित्तीय बोझ बन जाता है। -अनिमेष सक्सेना, निर्यातक अध्यक्ष उद्योग विहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन

आज छोटे उद्योग बढ़ती उत्पादन लागत, महंगी बिजली, ऊंचे ब्याज, धीमे भुगतान चक्र, निर्यात में गिरावट और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दबाव में संघर्ष कर रहे हैं। -कपिल साध, निर्यातक



इस समय सरकार की इस योजना से एमएसएमई को बहुत राहत मिलेगी। कई उद्योग जो पश्चिम एशिया युद्ध संकट के कारण बंद होने की कगार पर हैं, बच जाएंगे। -मनमोहन गेंद संरक्षक, मानेसर इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन
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सरकार चाहे तो इस ऋण को ब्याज मुक्त कर सकती है। सरकार को यह समझना होगा कि कमजोर नकदी प्रवाह वाले उद्योग केवल कर्ज के सहारे जीवित नहीं रह सकते । -सत्यपाल कांबोज, उद्यमी
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