निगमायुक्त प्रदीप दहिया के साथ मेकिंग मॉडल गुरुग्राम के पदाधिकारियों ने की बैठक
सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट की नई राह बनाने के लिए बढ़ाया कदम
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम को स्वच्छ बनाने के लिए निगमायुक्त प्रदीप दहिया के साथ मेकिंग मॉडल गुरुग्राम के पदाधिकारियों ने ढाई घंटे बैठक कर सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट की नई राह बनाने के लिए कदम बढ़ाया है।
निगम कार्यालय सेक्टर-34 में आयोजित बैठक में मेकिंग मॉडल गुरुग्राम ने लैंडफिल संकट को दूर करने और शहर के कचरा प्रबंधन तंत्र को स्थायी बनाने के बारे में जानकारी दी। इस पहल के तहत राज्य नेतृत्व और नागरिक समाज के साथ मिलकर शहर की सफाई और वेस्ट मैनेजमेंट में ठोस और दीर्घकालिक समाधान खोजने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। बैठक में पिछले 15 वर्षों में नागरिक समाज और कई प्रगतिशील आरडब्ल्यूए द्वारा किए गए कार्यों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की गई।
निगमायुक्त ने लोगों की भागीदारी और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि यह समय सामूहिक तौर पर काम करने का है, ताकि गुरुग्राम को स्वच्छ और स्वस्थ बनाया जा सके। मेकिंग मॉडल गुरुग्राम की संस्थापक गौरी सरीन ने कहा कि कचरे को स्रोत पर ही अलग-अलग करने, गीला और सूखा कचरा अलग एकत्र करने के साथ बल्क वेस्ट जनरेटर्स द्वारा अधिकतम इन-सिटू कम्पोस्टिंग हमारी प्राथमिक रणनीति है। शेष समाधान जोनल स्तर पर डिसेंट्रलाइज्ड बायो-सीबीजी और मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी केंद्रों में किया जाएगा। अब अधिकारियों और नागरिकों को मिलकर एक साझा दृष्टि और संकल्प बनाना होगा।
175 से अधिक आरडब्ल्यूए से मिले फीडबैक
ठोस कचरा प्रबंधन और सेनिटेशन नीति पर मेकिंग मॉडल गुरुग्राम की ओर से 175 से अधिक आरडब्ल्यूए से प्राप्त फीडबैक पर आधारित समुदाय संचालित स्थायी कचरा प्रबंधन मॉडल मॉडल प्रस्तुत किया गया। इसके तहत जागरूकता, शिक्षा, क्रियान्वयन, कानूनी पालन को प्रभावी तौर पर लागू करने, गार्बेज फ्री सिटी बनाने, प्राथमिक स्तर पर कचरा अलगाव, ताजे कचरे को लैंडफिल में कम से कम जाने, बायो-सीबीजी और रीसाइक्लिंग क्षमता विकसित करने पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान इंपीरिया एस्फेरा आरडब्ल्यूए अध्यक्ष रिंकी सिंह और बीपीटीपी पार्क सेरेन से संदीप शर्मा ने सेक्टर-37 सी व डी क्षेत्र की गंभीर समस्याओं को बताया। एसडब्ल्यूएम बायलॉज, ट्रांसफर स्टेशन, वेंडरों की इम्पैनलमेंट, तकनीकी उपयोग, प्रोत्साहन या दंडात्मक फ्रेमवर्क आदि पर भी विस्तार से चर्चा हुई। ढाई घंटे की मैराथन बैठक रही, जिसमें सभी पक्षों ने सक्रिय भागीदारी दिखाई।