-प्रधानाचार्यों को जारी किया कारण बताओ नोटिस, विभागीय कार्रवाई की तैयारी
दिनेश देशवाल
नूंह। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की दसवीं और बारहवीं कक्षाओं के परीक्षा परिणाम में नूंह जिला प्रदेश में सबसे निचले स्तर पर रहने के बाद अब शिक्षा विभाग सख्त कार्रवाई के मूड में नजर आ रहा है। खराब परीक्षा परिणाम वाले सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्यों और मुख्याध्यापकों पर विभागीय कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से उन सभी स्कूल मुखियाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जिनका बोर्ड परीक्षा परिणाम 40 प्रतिशत से कम रहा है।
विभाग ने जिले के सभी खंड़ शिक्षा अधिकारियों को नोटिस में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संबंधित प्रधानाचार्य और मुख्याध्यापक एक दिन के भीतर खराब परीक्षा परिणाम का विस्तृत लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। साथ ही पिछले तीन वर्षों का परीक्षा परिणाम रिकॉर्ड भी मांगा गया है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि लगातार खराब प्रदर्शन के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं। विभाग यह भी जांच करेगा कि स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था कमजोर है या फिर स्कूल मुखियाओं की कार्यशैली में कमी रही है। जिले में दसवीं कक्षा के 18 स्कूल ऐसे हैं, जिनका परीक्षा परिणाम 40 प्रतिशत से नीचे रहा। इनमें जीएसएसएस जाडोली का प्रदर्शन सबसे खराब रहा, जहां परीक्षा देने वाले आठों छात्र असफल हो गए। वहीं बारहवीं कक्षा में 31 स्कूलों का परिणाम 40 प्रतिशत से कम दर्ज किया गया। इनमें देवला नंगली स्कूल का परिणाम मात्र 11.43 प्रतिशत रहा, जो जिले में सबसे कम है।
खराब परिणाम को लेकर न केवल शिक्षा विभाग बल्कि जिला प्रशासन की भी काफी आलोचना हुई थी। लगातार सामने आ रही शिक्षकों की लापरवाही और स्कूलों में कमजोर शैक्षणिक व्यवस्था को देखते हुए अब प्रशासन भी जिम्मेदार अधिकारियों और स्कूल मुखियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार संबंधित स्कूल मुखियाओं को बुधवार तक अपना जवाब जमा कराने का समय दिया गया था और अधिकांश प्रधानाचार्यों व मुख्याध्यापकों ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में लिखित जवाब सौंप भी दिए हैं। हालांकि विभाग इन जवाबों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं बताया जा रहा। ऐसे में अब इनके खिलाफ विभागीय सेक्शन-7 के तहत कार्रवाई की सिफारिश निदेशालय को भेजने की तैयारी की जा रही है।
इन स्कूलों के मुखियाओं पर गिर सकती है गाज:
दसवीं कक्षा में जाड़ोली, बूबलहेडी, शाहचोखा, जमालगढ़, कैराका, बीसरु, रनियाला पटाकपुर, अलावलपुर, निजामपुर, राहडी, साकरस, मूलथान, बडेड, नई, दिहाना, रेवासन, टांई व देवला नंगली के स्कूलों का परीक्षा परिणाम 40 फीसदी से कम रहा है। वहीं 12वीं कक्षा का देवला नंगली, रेवासन, चीला, तुसैनी, शाहचोखा, फिरोजपुर नमक, टांई, बीबीपुर, कैराका, अडबर, भाकडौजी, फिरोजपुर झिरका, महूं, जाडौली, लुहिंगा, नीमका, घासेड़ा, नीमखेडा, बडेड, कंवरसिका, टपकन, ऊदाका, केजीबीवी फिरोजपुर झिरका, इंदाना, साकरस, आलदोका, छारोड़ा, दिहाना, रनियाला पटाकपुर, सालाहेड़ी और धुलावट के स्कूल शामिल हैं।
कार्रवाई का दायरा आगे बढ़ेगा :
शिक्षा विभाग ने संकेत दिए हैं कि कार्रवाई का दायरा आगे और बढ़ाया जाएगा। पहले चरण में केवल 40 प्रतिशत से कम परिणाम वाले स्कूलों से जवाब मांगा गया है, जबकि दूसरे चरण में बोर्ड के औसत 84 प्रतिशत से कम परिणाम वाले स्कूलों से भी स्पष्टीकरण लिया जाएगा। दूसरी ओर जिन स्कूलों का परिणाम 84 प्रतिशत से अधिक रहा है, उनके प्रधानाचार्यों और मुख्याध्यापकों को सम्मानित करने की योजना बनाई गई है।
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वर्जन
संसाधनों की कुछ कमी जरूर है, लेकिन हर बार उसी का बहाना बनाकर लापरवाही नहीं चलने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी स्कूल को शिक्षकविहीन नहीं रहने दिया जाएगा और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। विभाग का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा स्तर को बेहतर बनाना है ताकि आने वाले वर्षों में जिले का परीक्षा परिणाम सुधर सके।
राजेंद्र शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी